नई दिल्ली: कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के इंडिया गेट पर उन्नाव रेप मामले की पीड़िता और उनकी मां के साथ सुरक्षा बलों द्वारा किए गए व्यवहार की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे अमानवीय बताते हुए केंद्र सरकार और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए. राहुल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि बलात्कारियों को राहत मिलना और पीड़ितों को अपराधी जैसा व्यवहार करना कैसा न्याय है?
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया और सशर्त जमानत दे दी. कोर्ट ने शर्तें रखीं कि सेंगर पीड़िता के निवास से 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं आएंगे, उन्हें या उनकी मां को धमकी नहीं देंगे और जमानत शर्तों का उल्लंघन होने पर बेल रद्द हो जाएगी. हालांकि, पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के अलग मामले में 10 साल की सजा के कारण सेंगर अभी जेल में ही रहेंगे.
इस फैसले के विरोध में मंगलवार को पीड़िता, उनकी मां और महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना इंडिया गेट के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं. इस दौरान पैरामिलिट्री फोर्सेस और पुलिस ने उन्हें मीडिया से बात करने से रोका, जबरन हटाया और कुछ वीडियो में मां के साथ धक्का-मुक्की भी दिखी. एक वीडियो में पीड़िता की मां को चलती बस से उतरने की स्थिति में दिखाया गया. पीड़िता ने इसे अन्याय बताया और कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए खतरा है, वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगी.
राहुल गांधी ने पोस्ट में लिखा कि गैंगरेप पीड़िता को न्याय मांगने की आवाज उठाने पर ऐसा बर्ताव शर्मनाक है. सेंगर को जमानत मिलना निराशाजनक है, जबकि पीड़िता डर में जी रही है. उन्होंने कहा, लोकतंत्र में असहमति की आवाज दबाना गलत है, पीड़िता को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिलना चाहिए, न कि भय और प्रताड़ना. इस घटना से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. कई रिपोर्ट्स में पीड़िता ने कहा कि सेंगर की रिहाई उन्हें असुरक्षित महसूस करा रही है.