राम मंदिर के चढ़ावे पर बवाल के बीच चंपत राय हुए साइडलाइन? सीएम योगी के कार्यक्रम से रहेंगे दूर, हलचल तेज

Global Bharat 18 Jun 2026 01:47: PM 1 Mins
राम मंदिर के चढ़ावे पर बवाल के बीच चंपत राय हुए साइडलाइन? सीएम योगी के कार्यक्रम से रहेंगे दूर, हलचल तेज

Ayodhya Ram Mandir News : राम मंदिर के चढ़ावे गायब होने की जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंच रहे हैं.  शुक्रवार को रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचेंगे, लेकिन इस बार उनके मंदिर कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय दूर रहेंगे.

 जिला प्रशासन के प्रोटोकॉल निर्देश में चंपत राय से कहा गया है कि वह मुख्यमंत्री के मंदिर दर्शन कार्यक्रम के लिए किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राम मंदिर आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय को सीएम योगी के कार्यक्रम से दूरी बनाने के लिए क्यों कहा गया. क्या यह महज सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है या फिर राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवादों के बीच कोई बड़ा संदेश देने की कोशिश. अयोध्या से लेकर लखनऊ तक इसी चर्चा ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. 

जिला प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कहा गया है कि मुख्यमंत्री के राम मंदिर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए वह किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें. आमतौर पर मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों में चंपत राय की मौजूदगी प्रमुख रहती है. ऐसे में उन्हें प्रतिनिधि नियुक्त करने का निर्देश मिलना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है.

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हाल के दिनों में मंदिर में आने वाले दान, उसके प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एसआईटी जांच कर रही है. विपक्षी दल लगातार ट्रस्ट से जवाब मांग रहे हैं, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि हर रुपये का हिसाब नियमों के तहत रखा जा रहा है और सभी वित्तीय प्रक्रियाएं ऑडिट व्यवस्था के दायरे में हैं.

प्रशासन ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रखने का फैसला चढ़ावा विवाद से जुड़ा है, लेकिन समय और परिस्थितियों ने इस आदेश को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है. यही वजह है कि इसे सिर्फ सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि एक बड़े संदेश के तौर पर भी देख रहे हैं. अयोध्या में यह चर्चा भी तेज है कि यदि सब कुछ सामान्य था तो फिर मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम में ट्रस्ट के सबसे प्रमुख पदाधिकारी को स्वयं उपस्थित रहने के बजाय प्रतिनिधि भेजने के लिए क्यों कहा गया.

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