बिहार के इस क्षेत्र में 70% तक पहुंची मुस्लिम आबादी, कौन कर रहा आंतरिक सुरक्षा से खिलवाड़?

Global Bharat 09 Jan 2025 05:18: PM 3 Mins
बिहार के इस क्षेत्र में 70% तक पहुंची मुस्लिम आबादी, कौन कर रहा आंतरिक सुरक्षा से खिलवाड़?

पटना: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण हिंदू आबादी में तेजी से गिरावट देखी जा रही है. खासकर किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिलों में मुस्लिम आबादी बढ़ने से इन इलाकों की जनसांख्यिकी में काफी बदलाव आया है. यह मामला लालू यादव की पार्टी आरजेडी और उसके सहयोगी दलों की बढ़ती मुस्लिम तुष्टिकरण नीति से जुड़ा है, जो बिहार में गंभीर संकट का रूप ले सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1951 से 2011 के बीच बिहार के सीमांचल इलाकों में मुसलमानों की आबादी में 16% की बढ़ोतरी हुई और अब यह संख्या 40% से 70% के बीच पहुंच गई है. खास तौर पर किशनगंज में मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा है.

सीमांचल में 70% मुस्लिम आबादी

इतिहासकार ज्ञानेश कुडासिया ने दावा किया है कि बांग्लादेश में हिंदू जनसंख्या प्रतिशत में भारी गिरावट आई है, जो विभाजन के समय 42% से घटकर 2022 तक केवल 7.95% ही रह गई है. आलोचकों का कहना है कि सीमांचल में चल रहा तुष्टिकरण, बिहार को भी इसी तरह की राह पर ले जा सकता है, जिससे भारत की एकता खतरे में पड़ सकती है. दावा किया जा रहा है कि सीमांचल के कई जिलों में मुसलमानों की आबादी 40-70% है, जिसमें किशनगंज में सबसे अधिक अनुपात दर्ज किया गया है. यहां मुस्लिमों की कुल आबादी 70 प्रतिशत तक बताई गई है.

विभाजन के समय कैसी थी स्थिति

इतिहासकार दावा करते हैं कि विभाजन के समय बिहार के मुसलमानों ने भी पाकिस्तान के निर्माण में योगदान दिया था, क्योंकि आज भी कई ऐसे वीडियो आते रहते हैं, जिसमें दावा किया जाता है कि वह बिहारी है. हाल ही में पाकिस्तानी संसद से भी वीडियो आया था, जिसमें एक सांसद खुद को बिहारी बता रहा था. यह वीडियो भारत में खूब वायरल भी हुआ था. पाकिस्तान की सिंध प्रांतीय विधानसभा के सदस्य सैयद एजाज उल हक ने हाल ही में पुष्टि की कि बिहार के मुसलमानों ने गर्व के साथ भारत के विभाजन में भाग लिया और पाकिस्तान के निर्माण में योगदान दिया.

आरजेडी पर तुष्टिकरण का आरोप

कई हिंदू नेता अक्सर आरोप लगाते रहते हैं कि आरजेडी नेता मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए हिंदू धार्मिक आयोजनों और मान्यताओं का विरोध करते हैं. हाल ही में राबड़ी देवी के घर के बाहर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें लिखा था 'मंदिर का मतलब मानसिक गुलामी'. यह पोस्टर आरजेडी विधायक फतेह बहादुर सिंह ने लगाया था, जो हिंदू देवी-देवताओं पर विवादित बयान देने के लिए कुख्यात रहे हैं. वहीं कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों पर भी आरोप लगते हैं कि वह मुस्लिमों की आबादी बढ़ाने में सहायक हैं.

हिंदू धार्मिक आयोजनों पर हमले

जब बिहार में आरजेडी सत्ता में होती है, खासकर दरभंगा और सीमांचल क्षेत्र में हिंदू धार्मिक आयोजनों पर हमले बढ़ जाते हैं. हाल ही में दरभंगा में सरस्वती पूजा के दौरान मूर्ति विसर्जन के लिए निकाले गए जुलूस पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हमला किया था. ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, खासकर तब जब राज्य में आरजेडी की सत्ता होती है.

हिंदुओं के अधिकारों की अनदेखी

आरजेडी और उसके सहयोगी दलों ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध किया, जबकि इस कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना था. आरजेडी और इंडिया ब्लॉक पार्टियों ने इस कानून के खिलाफ मुसलमानों को भड़काया और इस मुद्दे का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला.

संविधान बदलने की भी धमकी

तेजस्वी यादव (जो बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम रह चुके हैं) ने हाल ही में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनकी सरकार मुसलमानों को दलित का दर्जा देने के लिए संविधान बदलने पर विचार करेगी. यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार के सीमांचल में मुसलमानों को आरक्षण देने की बात चल रही है.

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