रविवार शाम तक बांग्लादेश और इससे सटे पश्चिम बंगाल के तटों से भीषण चक्रवाती तूफान टकराएगा. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में यह मानसून से पहले इस सीजन का पहला चक्रवात है. हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवात के नामकरण प्रणाली के अनुसार इस तूफान का नाम रेमल गया है. इसका असर पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार तक होने वाला है.
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस तूफन की वजह से 102 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. आईएमडी ने मछुआरों को 24 मई तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी में, 26 मई तक मध्य बंगाल की खाड़ी में और 24 मई से 27 मई की सुबह तक उत्तरी बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह दी है. इस वजह से 26 और 27 मई को पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा, मिजोरम, त्रिपुरा और दक्षिण मणिपुर में भारी बारिश हो सकती है.
हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवात के नामकरण प्रणाली के अनुसार इस तूफान का नाम 'रेमल' रखा जाएगा. बता दें कि मौसम के पूर्वानुमानकर्ता भ्रम से बचने के लिए प्रत्येक उष्णकटिबंधीय चक्रवात को एक नाम देते हैं. सामान्य तौर पर, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण क्षेत्रीय स्तर पर नियमों के अनुसार किया जाता है.
हिंद महासागर क्षेत्र के लिए 2004 में चक्रवातों के नामकरण के लिए एक सूत्र पर सहमति बनी थी. इस क्षेत्र के आठ देशों बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड सभी ने कुछ नाम दिए थे, ऐसे में जब भी कोई चक्रवाती तूफान विकसित होता है, तो उसे क्रमिक रूप से एक नाम दिया जाता है.
चक्रवात को ऐसा नाम दिया जाता है, जो याद रखने और उच्चारण में आसान हो. आपत्तिजनक या विवादास्पद नाम नहीं रखे जाते. इन नामों को विभिन्न भाषाओं से भी चुना जाता है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों के लोग उन्हें पहचान सकें. नामकरण प्रणाली समय के साथ विकसित हुई है.
शुरुआती वर्षों में, नामों को वर्णानुक्रम के अनुसार चुना जाता था. वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर के आधार पर एक नाम रखा जाता था. हालांकि इस प्रणाली से भ्रम पैदा होता था और नाम याद रखने में कठिनाई होती थी. इसलिए पूर्व-निर्धारित नामों की वर्तमान प्रणाली शुरू की गई.