राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव ने मुस्लिम समुदाय को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. इस बार लालू यदाव ने मुस्लिम आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है. लालू यादव ने पटना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वोट हमारे पक्ष में हैं. वे (एनडीए) कह रहे हैं कि बिहार में ‘जंगल राज’ होगा क्योंकि वे डरे हुए हैं.
लालू यादव ने कहा कि वे भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. वे संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं. इस दौरान लालू यादव ने मुस्लिम आरक्षण पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को तो आरक्षण मिलना ही चाहिए.
ऐसे में लालू यादव साफ-साफ कहते हैं कि मुसलमानों को आरक्षण मिलना चाहिए, तो सवाल है कि इस देश का हिंदू कहां जाएगा, क्या हिंदुओं में गरीब नहीं है, क्या दलित-पिछड़े और ओबीसी को जो आरक्षण मिल रहा है. उसे लालू यादव खत्म करवाना चाहते है. ये सवाल हम नहीं उठा रहे हैं, बल्कि लालू यादव का ये बयान इस सवाल को बल दे रहा है.
क्या पिछड़ों की बात करने वाले लालू यादव अब सिर्फ मुस्लिम आरक्षण चाहते हैं, क्या उनके बयान का मतलब सिर्फ यही है या फिर वो राहुल गांधी की उस सोच की पैरवी कर रहे है, जिसमें अल्पसंख्यकों को संपत्ति बांटने की बात कही जाती है. आखिर आपने जो पैसा मेहनत से कमाया है, वो पैसा कोई किसी और में कैसे बांट सकता है.
ये सवाल इतना बड़ा और कड़ा है कि हो सकता है आरजेडी के कुछ बड़े नेता पार्टी छोड़ने तक की बात करने लगे, क्योंकि जिन यादवों ने लंबे वक्त तक पार्टी की सेवा की, जिन्हें लालू यादव ने समाज में सम्मान से जीने का हक दिलवाया, उनके बच्चों से आरक्षण का हक छीना जाएगा तो क्या वो चुप बैठेंगे.
लालू यादव की राजनीति को नजदीक से समझने वाले लोग कहते हैं कि लालू का ये बयान उतना ही चुनावी है, जितना कि वो देवी माता की लॉकेट की बात करते हैं और फिर सावन के महीने में मटन बनाने लगते हैं. उनके बेटे तेजस्वी यादव नवरात्रि के दिनों में हेलीकॉप्टर में बैठकर मछली खाते हैं, बाद में पता चलता है ये दोनों वीडियो नवरात्रि और सावन के नहीं हैं.
पर इसी टाइम पर वीडियो रिलीज करने से सवाल खड़े होते हैं और अब लालू यादव अगर ऐसा बयान दे रहे हैं, तो समझिए कि विपक्ष का ध्यान सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम वोटों पर है.
वो चाहते हैं कि किसी भी हाल में हम वोटों का ध्रुवीकरण करें. जैसे बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे पर मुखर है और उस पर उसे वोट मिलते हैं. वैसे ही लालू यादव की राजनीति अब सिर्फ मुस्लिम समीकरण के ईर्द-गिर्द घूमने लगी है.