पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी को मिली बुरी हार के बाद पार्टी में विद्रोह की आग भड़क उठी है. सोमवार को पूर्व सीएम राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास के बाहर सैकड़ों कार्यकर्ता जमा हो गए. उन्होंने संजय यादव के खिलाफ तीखे नारे लगाए और उनका पुतला जलाकर विरोध जताया. यह सब तेजस्वी यादव को विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने जाने के महज कुछ घंटों बाद हुआ.
सुबह से ही कार्यकर्ता जुटने लगे थे. संख्या बढ़ते ही हवा में गूंजे 'संजय यादव मुर्दाबाद', 'बिहार छोड़ो संजय' और 'रोहिणी दीदी जिंदाबाद' जैसे नारे. राज्यसभा सांसद संजय यादव को हार का जिम्मेदार ठहराते हुए कार्यकर्ताओं ने उन पर चुनावी रणनीति बर्बाद करने का इल्जाम लगाया. एक प्रदर्शनकारी ने चिल्लाया, ''हरियाणा का संजय बिहार की राजनीति को अपनी दुकान समझ बैठा. टिकट बांटने से लेकर प्रचार तक सब उल्टा किया. हम रोहिणी बहन के साथ खड़े हैं.''
लालू प्रसाद यादव ने कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन गुस्सा ठंडा न हुआ. प्रदर्शन रोहिणी आचार्य के हालिया बयानों से हवा पा रहा है. शनिवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर राजनीति और परिवार से किनारा करने की घोषणा की. रोहिणी ने संजय यादव और रमीज नेमत पर गंभीर आरोप लगाए. कहा कि इन्होंने उन्हें गालियां दीं, अपमानित किया और चप्पल तक उठाई. उन्होंने लिखा, ''संजय और रमीज ने धमकाया कि राजनीति छोड़ो वरना परिवार से कट जाओ. हार का सारा बोझ मेरी गोद में डाल दिया.''
रोहिणी का कहना था कि संजय के दबाव में तेजस्वी के फैसले गलत हुए, जिससे पार्टी की कमर टूट गई. एयरपोर्ट पर भावुक होकर उन्होंने कहा, ''संजय का नाम लेते ही घर से भगाते हैं. किडनी दान करने के बाद भी इज्जत नहीं मिली. मेरा परिवार ही बिखर गया.'' 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण से हारीं रोहिणी ने दावा किया कि उन्हें करोड़ों के लालच और गंदी किडनी का ताना दिया गया.
चुनाव नतीजों ने आरजेडी को करारा झटका दिया. महागठबंधन को कुल 35 सीटें मिलीं, जबकि आरजेडी ने 143 में से सिर्फ 25 पर कब्जा किया. एनडीए ने 202 सीटों से साफ बहुमत हासिल कर लिया. आंतरिक कलह और रणनीतिक चूक को विशेषज्ञ हार की मुख्य वजह बता रहे हैं. जनता दल यूनाइटेड ने तो तंज कसते हुए महाभारत के किरदारों से तुलना की—लालू को धृतराष्ट्र, राबड़ी को गांधारी, तेजस्वी को दुर्योधन और संजय को संजय तक कहा.
बीजेपी ने मौके का फायदा उठाते हुए आरजेडी पर 'महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता' का आरोप लगाया. रविवार को रोहिणी के अलावा उनकी तीनों बहनें- राजलक्ष्मी, रागिनी और चंदा भी दिल्ली चली गईं. लालू-राबड़ी के घर में अब उदासी छाई हुई है. पार्टी के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह पारिवारिक फूट बिहार की सियासत को नई दिशा दे सकती है.