नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शुक्रवार को प्रशासन ने एक मस्जिद को "अवैध निर्माण" बताकर ध्वस्त कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद का निर्माण बिना जरूरी अनुमति और स्वीकृत नक्शे के किया गया था. इस कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है. सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रशासन ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया.
प्रशासन का दावा
सहारनपुर के एक अधिकारी सुबोध कुमार ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि मस्जिद का निर्माण अवैध था, क्योंकि इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी और न ही इसका नक्शा स्वीकृत था. उन्होंने बताया कि मस्जिद प्रशासन को नक्शा स्वीकृत कराने के लिए नोटिस भेजा गया था, लेकिन निर्माण कार्य जारी रहा. इसलिए, इस अवैध निर्माण को हटाने का फैसला लिया गया. सुबोध कुमार ने यह भी कहा कि सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी तरह के हों.
इमरान मसूद का विरोध
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को गलत ठहराया और कहा कि मस्जिद को अवैध बताना उचित नहीं है. उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण लोगों ने अपनी निजी जमीन पर किया था और इसकी जानकारी प्रशासन को पहले ही दी गई थी. मसूद ने सवाल उठाया, "गांव में नक्शे की अवधारणा कहां से आती है? यह मस्जिद लोगों की अपनी जमीन पर बन रही थी." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने कोई उचित नोटिस नहीं दिया और न ही 15 दिन का समय दिया गया. मसूद ने कहा, "नोटिस पर कोई सुनवाई नहीं हुई. प्रशासन ने बिना किसी प्रक्रिया के मस्जिद को तोड़ दिया. हम विरोध के लिए नहीं गए, क्योंकि अगर जाते, तो वे हमें गोली मार देते. इसलिए, हम इस मामले को कानूनी रूप से लड़ेंगे."
एकतरफा कार्रवाई का आरोप
इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया है और इसे लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मसूद के बयान ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है. उन्होंने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं. मसूद ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और कानूनी रास्ता अपनाकर न्याय की मांग करेंगे. यह घटना उत्तर प्रदेश में पहले भी हुए बुलडोजर कार्रवाइयों के सिलसिले में एक नया विवाद जोड़ती है, जहां अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं.
इमरान मसूद ने इस मामले में कानूनी लड़ाई की बात कही
यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक कार्रवाइयों के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करता है. मस्जिद जैसे धार्मिक स्थल को तोड़ने की कार्रवाई से पहले उचित नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है, ताकि लोगों की भावनाएं आहत न हों. इमरान मसूद ने इस मामले में कानूनी लड़ाई की बात कही है, जो यह दर्शाता है कि यह विवाद अभी और बढ़ सकता है. सहारनपुर में पहले भी धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर तनाव देखा गया है, और यह घटना उसमें एक नया अध्याय जोड़ सकती है.