संभल: संभल की प्रसिद्ध जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अफताब हुसैन वारिस और उनके भाई मेहताब हुसैन पर बड़ी जमीन घोटाले का मामला सामने आया है. दोनों पर सरकारी जमीन को छिपाकर वक्फ प्रॉपर्टी के रूप में रजिस्टर कराने का आरोप लगा है. स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सैफ खान सराय इलाके में स्थित करीब 2 एकड़ सरकारी जमीन (जिसकी बाजार मूल्य 5 करोड़ रुपए से अधिक है) को दोनों भाइयों ने दशकों पहले स्थानीय राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से अपनी नाम पर रजिस्टर करा लिया.
यह जमीन मूल रूप से सार्वजनिक संपत्ति थी, जिसे सामुदायिक पेड़रोपण के लिए चिह्नित किया गया था. आरोप है कि दोनों ने जाली दस्तावेजों के जरिए इस जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह भी बना ली. इसके बाद पूरे प्लॉट को वक्फ बोर्ड में रजिस्टर करा दिया.
कोर्ट पहले ही कर चुका है फैसला
27 जनवरी 2003 को स्थानीय प्रशासनिक अदालत ने दोनों भाइयों के फर्जी टाइटल रद्द कर दिए थे और रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया था. इसके बावजूद अवैध निर्माण हटाए नहीं गए. इसके बाद राजस्व अधिकारी (लेखपाल) मुकेश यादव की शिकायत पर संभल सदर कोतवाली पुलिस ने दोनों भाइयों और मिलीभगत करने वाले राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329(3), 318(4), 336(3), 338, 340(2) और पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है. इससे पहले 7 मार्च को धीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने अवैध निर्माणों को गिराने का आदेश दिया और दोनों भाइयों पर 7 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया था. इमाम ने इस आदेश के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में अपील की है, लेकिन अब वक्फ दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का नया मामला उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है.
संभल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी केके बिश्नोई ने पुष्टि की है कि वक्फ ट्रिब्यूनल पहले ही इस मामले में फैसला सुना चुका है. यह मामला उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड और सरकारी जमीनों के दुरुपयोग को लेकर उठ रहे सवालों को एक बार फिर तीखा कर रहा है. जांच जारी है.