डेस्क : तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर चंदन तस्कर वीरप्पन का नाम सुर्खियों में चल रहा है. पुलिस एनकाउंटर में करीब दो दशक पहले चंदन के बड़े तस्कर वीरप्पन की मौत हो गई थी. वीरप्पन के मौत होने के बाद इस बार बेटी और उनकी पत्नी दोनों चुनावी मैदान में है. राजनीति के जरिए दोनों वीरप्पन की छवि को बदलने की कोशिश कर रही है, जहां उन्हें तमिल मसीहा तमिलों के रक्षक के रूप में लोगों के बीच बता रही है.
वीरप्पन की 35 वर्षीय बड़ी बेटी विद्यारानी तमिलर काची पार्टी एनटीके से मेट्टूर सीट से चुनावी मैदान में है. विद्या रानी पैसे से वकील भी है और दूसरी बार चुनावी मैदान में उतरी हुई है. वहीं, उनकी मां मुथूलक्ष्मी तमिलगा वाझवुरिमाई काची पार्टी से कृष्णगिरी सीट से चुनावी मैदान में है. दोनों पार्टियां तमिल राष्ट्रवाद को लेकर समर्थन करती है और प्रोत्साहित कर रही है. उनकी बेटी ने कहा कि अगर मेरे पिता जीवित होते तो वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में फरुर शामिल होते.
वीरप्पन की पत्नी ने 2006 में चुनाव लड़ा था. बतौर निर्दलीय उम्मीदवार उन्होंने चुनावी मैदान में भाग्य आजमाया था. उनकी बेटी विद्यारानी 2024 में लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाया था, जहां एनटीके से चुनावी मैदान में थी. इस चुनाव में भी उन्हें एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे. एक बार फिर पत्नी और बेटी दोनों मुख्य धारा की राजनीति में वापस आने की कोशिश कर रहे हैं. मां और बेटी दोनों वीरप्पन की छवि को नया तरीके से जनता तक ले जा रही है.
मेट्टूर में रैली के दौरान विद्यारानी ने कहा था कि वीरप्पन उतना खूंखार नहीं था, जितना उस बनाकर पेश किया गया. उन्होंने शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की थी. विद्यारानी को युवाओं से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. दोनों पार्टियों की राष्ट्रवाद की गूंज जनता तक पहुंच रही है.