पटना: राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को बिहार की सत्ताधारी गठबंधन सरकार पर जोरदार प्रहार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता में बैठे लोग बिहार की भलाई की बजाय सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं. मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर राज्यसभा भेजने का फैसला पहले से तय था.
उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान ये लोग इस बात को खुलकर कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे. अब वही हो रहा है जो उन्होंने पहले ही बता दिया था. तेजस्वी ने आगे कहा कि नीतीश कुमार की भूमिका अब काफी सीमित कर दी गई है. उन्हें अपनी मर्जी के बिना राज्यसभा भेजा गया है. जद(यू) के कुछ बड़े नेताओं ने कथित तौर पर सीबीआई-ईडी के डर या फिर लालच के चलते नीतीश कुमार को फंसाने का खेल खेला है.
जनादेश की अनदेखी का आरोप
तेजस्वी यादव ने साफ कहा कि भले ही कितनी भी नई सरकार बन जाए, लेकिन उसमें जनता का जनादेश नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष को बिहार की कोई चिंता नहीं है. कैबिनेट की बैठकें तक नहीं हो रही हैं. उन्होंने किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि फसलें खराब हो रही हैं, लेकिन सरकार बेपरवाह है. कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है. शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है. अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिल रही हैं और स्कूल-कॉलेजों की हालत दयनीय है. तेजस्वी ने कहा कि यह सरकार किसी 'तंत्र-मंत्र' के जरिए बनाई गई है, जिसमें जनता के वोट और जनादेश की पूरी तरह से अनदेखी की गई है.
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में भी बोले तेजस्वी
इसके अलावा तेजस्वी यादव ने शनिवार को पटना में राजद के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक बड़े अभिनंदन समारोह में भी हिस्सा लिया. वहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और संगठन को मजबूत बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली किसी भी भाषा का विरोध करना चाहिए. तेजस्वी ने लोगों से मौजूदा राजनीतिक स्थिति को समझते हुए संघर्ष करने का आह्वान भी किया.