नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 28 अप्रैल 2025 को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की. यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, और इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. इस मुलाकात को पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
पहलगाम हमले के बाद मोहन भागवत ने अपने बयानों में सख्त रुख अपनाया था. उन्होंने कहा था कि यह लड़ाई धर्म और अधर्म के बीच है. भारत अहिंसा में विश्वास रखता है, लेकिन जब कोई अत्याचार करता है, तो उसे दंड देना भी जरूरी है. उन्होंने रावण के वध का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई सुधरने से इनकार करता है, तो उसका अंत अनिवार्य हो जाता है. भागवत ने यह भी कहा कि भारत अपने पड़ोसियों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अगर कोई बुराई करता है, तो राजा का कर्तव्य है कि वह अपनी प्रजा की रक्षा करे. उनके ये बयान पाकिस्तान पर सीधी चेतावनी माने गए.
इससे पहले पीएम आवास पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीनों सेना प्रमुख के साथ बैठक हुई. बैठक में पहलगाम हमले के जवाब में सैन्य और कूटनीतिक कार्रवाइयों पर गहन चर्चा हुई. भारत ने पहले ही कई बड़े कदम उठाए हैं, जैसे सिंधु जल संधि को निलंबित करना, अटारी-वाघा बॉर्डर को बंद करना, और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा पर प्रतिबंध लगाना. इसके अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को उजागर किया है.
पहलगाम हमले के बाद देश में गुस्सा और बदले की मांग तेज हो गई है. सरकार ने आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का वादा किया है. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने श्रीनगर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और आतंकियों को चुन-चुनकर खत्म करने की बात कही है. मोहन भागवत और पीएम मोदी की इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा. यह मुलाकात और इसके बाद उठाए गए कदम पाकिस्तान के लिए सख्त संदेश हैं कि भारत जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है.