नई दिल्ली: निठारी कांड के कुख्यात आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है. हरिद्वार पुलिस के अनुसार, उनकी मौत गले में फंदा लगने से दम घुटने के कारण हुई. 18 सितंबर को हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में कोली अपनी चाय की दुकान पर मृत पाए गए थे. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उनका शरीर जमीन पर था और रस्सी टूटी हुई मिली. नाक-मुंह से खून निकल रहा था, जिसको लेकर कुछ लोगों ने हत्या का संदेह जताया था.
पुलिस ने स्पष्ट किया कि फांसी लगाने के दौरान 90 प्रतिशत मौत गले में फंदा फंसने से हो चुकी थी. रस्सी टूटने के बाद शरीर जमीन पर गिर गया. कई मामलों में आत्महत्या के बाद रक्तचाप बढ़ने से नाक-मुंह से खून निकलना सामान्य है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की प्रमुख वजह दम घुटना बताई गई है.
नाम बदलकर रह रहे थे हरिद्वार में
सुरेंद्र कोली कुछ महीने पहले हरिद्वार आए थे. वे मूल रूप से अल्मोड़ा के मंगरुखाल गांव के रहने वाले थे. यहां वे सदाराम नाम से रह रहे थे. पहले उन्होंने रोशनाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की, फिर मंदिर के सामने किराए पर चाय की दुकान चला रहे थे. उनके दो भाई हैं—एक दिल्ली में नौकरी करते हैं, दूसरा अल्मोड़ा में शिक्षक हैं.
परिजनों और पीड़ितों ने उठाए सवाल
कोली की मौत पर निठारी कांड के पीड़ित परिवारों और उनके परिजनों ने संदेह जताया था. पीड़ित झब्बू लाल ने दावा किया था कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या हो सकती है. उन्होंने सवाल किया कि जेल से रिहा होने और कई महीने बाहर बिताने के बाद कोली ऐसा कदम क्यों उठाएंगे.
निठारी कांड 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 में सामने आया था, जिसमें कई बच्चों और महिलाओं की हत्याओं का मामला शामिल था. कोली इस मामले के मुख्य आरोपी रहे थे. पुलिस ने मौत को आत्महत्या करार दिया है. आगे कोई उच्च स्तरीय जांच की मांग परिजनों की तरफ से की जा रही है.