नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति, बजट प्राथमिकताओं और पेपर लीक घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में डॉ. जोशी ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ परीक्षा प्रणाली की नाकामी नहीं, बल्कि समाज और शासन में बढ़ते भ्रष्टाचार का नतीजा है.
उन्होंने पूछा कि मैं बड़े विनम्र भाव से पूछता हूं कि वाजपेयी जी के समय पेपर लीक क्यों नहीं होते थे? उन्होंने आगे कहा कि जब बैंकों और व्यापार में घोटाले हो रहे हैं और सरकार खुद घोटालों में फंसी हुई है, तो इसका असर शिक्षा और छात्रों पर भी पड़ता है. छात्रों को जब लगता है कि शिक्षकों की नियुक्तियां घूस से हो रही हैं, तो वे भी गलत रास्ता अपनाने में संकोच नहीं करते. पेपर लीक रोकने के लिए विमान, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के इस्तेमाल पर उन्होंने टिप्पणी की, ''ऐसा लगता है जैसे यह परीक्षा नहीं, युद्ध छिड़ गया हो.''
डॉ. जोशी ने शिक्षा बजट में कटौती और स्वास्थ्य पर कम खर्च की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि सड़कें बनाना ही विकास नहीं है. मजबूत शिक्षा प्रणाली के बिना इंजीनियर और मशीनें भी नहीं बन सकतीं. दिल्ली में एमए, पीएचडी और बीएड डिग्री वाले लोग सफाई कर्मचारी या संविदा पर काम करने को मजबूर हैं. शिक्षा और चिकित्सा सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं होने चाहिए.
विकसित भारत के दृष्टिकोण पर उन्होंने कहा कि आधुनिक मानदंडों के बजाय मानवीय जीवन मूल्यों पर ध्यान देना होगा. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के निर्माण में नीति आयोग की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाए और पड़ोस के स्कूल सिस्टम की वकालत की, जहां अमीर-गरीब सभी बच्चों को समान और मुफ्त शिक्षा मिले. ये टिप्पणियां वरिष्ठ भाजपा नेता की ओर से आई हैं, जिन्होंने अतीत में शिक्षा मंत्री के रूप में काम किया है.