नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के शोपियां के ताक मोहल्ला में दशकों बाद कश्मीरी पंडित समुदाय ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से दोबारा जुड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया, यहां सैकड़ों कश्मीरी पंडितों की मौजूदगी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई. पूजा-पाठ और हवन के बीच नींव का पत्थर रखा गया तो माहौल श्रद्धा और भावनाओं से भर गया.
कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए यह आयोजन केवल मंदिर निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और पुरानी धार्मिक परंपराओं से दोबारा जुड़ने का प्रतीक माना जा रहा है. विस्थापन के लंबे दौर के बाद समुदाय के लोगों का अपने पुराने इलाके में धार्मिक आयोजन के लिए एकत्र होना अपने आप में महत्वपूर्ण रहा.
ताक मोहल्ला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा और हवन किया गया, इसके बाद विधि-विधान से राम मंदिर की आधारशिला रखी गई. कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी संस्कृति और आस्था को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया.
कश्मीरी पंडित समुदाय लंबे समय से घाटी में अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़ा रहा है. ऐसे में शोपियां में मंदिर निर्माण की नींव रखे जाने को समुदाय के लिए उम्मीद और पुनर्स्थापना की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया. पूजा और हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान राम से शांति, समृद्धि और क्षेत्र में आपसी सौहार्द की कामना की. मंदिर निर्माण की शुरुआत के साथ अब स्थानीय स्तर पर धार्मिक विरासत को संरक्षित करने की उम्मीद भी बढ़ी है.
यह आयोजन कश्मीरी पंडितों के लिए अपने अतीत, आस्था और सांस्कृतिक पहचान से दोबारा जुड़ने का एक भावनात्मक अवसर बनकर सामने आया.