चंडीगढ़/पंचकुला: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा में एक बड़े बैंक घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया. यह घोटाला IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के बैंक खातों से सैकड़ों करोड़ रुपए हेराफेरी कर शेल कंपनियों में भेज दिए गए.
राम कुमार सिंह कौन हैं?
राम कुमार सिंह 2012 बैच के IAS अधिकारी हैं, जिन्हें हरियाणा सिविल सर्विसेज (HCS) से प्रमोशन मिला था. वे पंचकुला नगर निगम के कमिश्नर रह चुके हैं (अक्टूबर 2020 से मई 2021 और फिर जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक). CBI के अनुसार, अकेले पंचकुला नगर निगम के मामले में 79.46 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई.
कैसे हुआ घोटाला?
CBI जांच में पता चला कि पंचकुला नगर निगम का बैंक खाता नियमों का उल्लंघन कर खोला गया. राम कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खोलने के बहाने बिचौलियों के जरिए हस्ताक्षरित चेक बैंक अधिकारियों को सौंपे. इन चेकों से पैसे निकालकर कोई FD नहीं बनाई गई, बल्कि राशि फर्जी शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दी गई. नगर निगम के वरिष्ठ लेखाकार सुरेंद्र जैन को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.
6 और IAS अधिकारियों पर शिकंजा
राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार (2011 बैच) को पहले ही निलंबित किया जा चुका है. अब हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत 6 अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है. इनके नाम हैं, मोहम्मद शाईन, पंकज अग्रवाल, डीके बेहरा, मणि राम शर्मा, विनीत गर्ग, साकेत कुमार. इनमें से कुछ अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी भी हो चुकी है. CBI के अनुसार कुल 657 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है.
अब तक 15 लोगों और 3 शेल कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन IAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट अभी बाकी है. यह मामला सरकारी खजाने के साथ छेड़छाड़ की गंभीरता को उजागर करता है. CBI की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.