नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर शुक्रवार को लोकसभा में पार्टी के सांसदों की उस महत्वपूर्ण बैठक में नजर नहीं आए, जिसकी अध्यक्षता राहुल गांधी ने की थी. इससे पार्टी के अंदर एक बार फिर उनके बार-बार की अहम बैठकों से अनुपस्थित रहने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. पार्टी सूत्रों का दावा है कि थरूर ने पहले ही नेतृत्व को अपनी अनुपलब्धता की सूचना दे दी थी, लेकिन कांग्रेस के मुख्य सचेतक ने कहा कि उन्हें सांसद के अनुपस्थित रहने की वजह की जानकारी नहीं है.
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर के साथ-साथ चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी भी इस बैठक में नहीं आए नहीं. थरूर के सार्वजनिक कार्यक्रम के अनुसार, वे गुरुवार रात कोलकाता में प्रभा खेतान फाउंडेशन के एक आयोजन में शामिल हुए थे, जिससे लगता है कि वे बैठक के लिए समय पर दिल्ली नहीं लौट पाए. यह घटना कुछ ही दिनों बाद हुई है जब थरूर ने 30 नवंबर को हुई कांग्रेस की रणनीतिक समूह की बैठक को जानबूझकर नहीं छोड़ने की सफाई दी थी. उन्होंने कहा था कि उस समय वे केरल से दिल्ली आते हुए फ्लाइट में थे. 1 दिसंबर को उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “मैंने बैठक नहीं छोड़ी थी; मैं केरल से आते हुए विमान में था.”
इससे पहले भी वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR मुद्दे पर हुई कांग्रेस की चर्चा में शामिल नहीं हो पाए थे. उस समय उनके दफ्तर ने बताया था कि वे 90 वर्षीय मां के साथ केरल से देर वाली फ्लाइट से आ रहे थे और समय पर दिल्ली नहीं पहुंच सके. उस बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी केरल में स्थानीय निकाय चुनाव प्रचार के कारण अनुपस्थित रहे थे.
फिर भी, पार्टी के कुछ नेताओं में थरूर की लगातार अनुपस्थिति को लेकर बेचैनी बढ़ रही है, खासकर तब जब वे ही एकमात्र कांग्रेस नेता थे जिन्हें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राजकीय भोज के लिए न्योता मिला था. इस निमंत्रण से पार्टी में खुसुर-फुसुर शुरू हो गई थी.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा था, “हर किसी का अंतर्मन बोलता है. जब मेरे नेता को बुलावा नहीं आता और मुझे आता है, तो समझ जाना चाहिए कि खेल क्या हो रहा है, कौन खेल रहा है और हमें उसमें हिस्सा क्यों नहीं होना चाहिए.” कांग्रेस नेतृत्व ने इस पूरे मामले पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है.