नई दिल्ली: बीएमसी चुनाव में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के महायुति गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है. भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं, जिससे कुल 118 सीटों के साथ वे मजबूत स्थिति में हैं. लेकिन मेयर पद को लेकर अब सियासी तल्खी बढ़ गई है. उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने दावा किया कि शिंदे गुट के कई नवनिर्वाचित नगरसेवक भाजपा का मेयर नहीं चाहते.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शिंदे ने अपने 29 पार्षदों को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में "कैद" कर रखा है, जैसे जेल बना दिया हो. राउत का कहना था कि ये असली शिवसैनिक हैं, जिनके दिल में मराठी अस्मिता की भावना अभी भी जिंदा है. उन्होंने यह भी इशारा किया कि बहुमत कितना भी मजबूत दिखे, वो चंचल होता है और हालात जल्दी बदल सकते हैं. साथ ही उन्होंने खुलासा किया कि उद्धव और राज ठाकरे के बीच फोन पर बात हुई है और पर्दे के पीछे कई स्तरों पर चर्चाएं चल रही हैं.
राउत ने व्यंग्य किया कि वे खुद भी उस होटल में खाना खाने जा रहे हैं. दूसरी तरफ, शिंदे गुट की प्रवक्ता शीतल म्हात्रे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि कोई कैद या रोक-टोक नहीं है. यह दो-तीन दिनों का प्रशिक्षण शिविर है, जहां नए-नए चुने गए 20 पार्षदों को बीएमसी के कामकाज और सदन की कार्यवाही समझाई जा रही है.
म्हात्रे ने कहा कि खुद एकनाथ शिंदे भी उनसे मिलने आएंगे. उन्होंने राउत पर पलटवार करते हुए कहा कि उद्धव गुट को अपने ही लोगों के टूटने का डर है, इसलिए ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं. मेयर पद पर सौदेबाजी की अटकलों को खारिज करते हुए शीतल म्हात्रे ने दो टूक कहा, सारे फैसले पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे ही लेंगे.
उन्होंने जोर देकर बताया कि चुनाव महायुति के बैनर तले भाजपा के साथ मिलकर लड़ा गया था, जीत सामूहिक है और आगे भी गठबंधन पूरी ताकत के साथ साथ रहेगा. मेयर समेत हर निर्णय गठबंधन में ही लिया जाएगा. कुल मिलाकर, गठबंधन की एकजुटता पर शिंदे गुट ने फिर से मुहर लगाई है और उद्धव गुट के मंसूबों को सिरे से नकार दिया है. मुंबई की सियासत में मेयर की कुर्सी को लेकर अभी थोड़ा सस्पेंस बरकरार है, लेकिन महायुति का रुख बिल्कुल साफ नजर आ रहा है.