अभिषेक शांडिल्य
योगी के बाद अगर कोई ताकतवर CM हैं तो उनका नाम है मोहन यादव. शहजाद का घर 24 घण्टे में कोई गिरवा सकता है तो उनका नाम है मोहन यादव, लेकिन उनके ही राज्य में एक ऐसा कांड हुआ जिसके बाद सूरत की तरह हिन्दुओं ने THANK YOU नहीं कहा बल्कि रतलाम के मुसलमानों ने वहां के SSP राहुल लोढ़ा को अपना हीरो मान लिया. MP में योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक रिश्ते में छोटे भाई मोहन यादव की सरकार है, लेकिन उनके रहते रतलाम में जो हुआ क्या उसकी जानकारी क्या आपको है...
भगदड़ मचती है, एक की मौत हो जाती है, लेकिन मज़ाल है SSP ने किसी पत्थरबाज़ पर कार्रवाई की हो? IPS रतलाम राहुल लोढ़ा या तो बहुत ईमानदार हैं या फिर इन्होंने कुछ ऐसा किया जो शायद एक IPS अधिकारी को करना ही नहीं चाहिए था. मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ख़बर फैलती है. दावा किया जाता है कि गणेश उत्सव के दौरान किसी ने पत्थरबाज़ी की. जब तक कोई पकड़ा जाता तब तक सोशल मीडिया के ज़रिए ख़बर पूरे रतलाम में फैल जाती है. हिन्दू संगठन मांग करता है कि पत्थरबाज़ों को गिरफ्तार किया जाए, हालांकि मध्यप्रदेश के रतलाम में मोहन यादव के रहने के बाद भी कार्रवाई पत्थरबाज़ों पर नहीं की जाती है? सीधी कार्रवाई होती है उनपर जो ये कहते हैं कि उनपर और उनके भगवान पर पत्थर मारा गया.
थाने को हिन्दू पक्ष घेर लेता है, समाज का हर वर्ग उस प्रदर्शन में शामिल होता है. IPS राहुल लोढ़ा किसी की बात नहीं सुनते हैं, कोई जांच नहीं करवाते है, ना ही वक्त लेते हैं, वो मीडिया में बयान जारी करते हैं कि कहीं भी पत्थरबाज़ी की कोई ख़बर नहीं है. हिन्दू संगठन का आरोप है कि SSP रतलाम ने एकतरफा कार्रवाई की, पत्थरबाज़ी की घटना को नज़रअंदाज कर गणेश भक्तों पर ही उल्टी कार्रवाई कर दी. 200 से ज्यादा लोगों के ख़िलाफ शहर की शांति भंग करने का मुकदमा लिखवा दिया. ये ख़बर आग की तरह फैली. कलेक्टर के पास SPP की शिकायत पहुंची, मंगलवार को शिकायत में कहा गया कि IPS राहुल लोढ़ा ने मुसलमानों पर कोई एक्शन नहीं लिया.
अगर पत्थरबाज़ी नहीं हुई तो फिर अचानक भगदड़ कैसे मची? भगदड़ में एक की मौत कैसे हुई? मध्य प्रदेश के ज़िला रतलाम में हिन्दू संगठन पुलिस के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर कर नारेबाज़ी कर रहा था...ये बात क्या IPS राहुल लोढ़ा को बुरी लगी? पूरा ज़िला नाराज़ है? पत्थरबाज़ी हुई थी या नहीं ये जांच का विषय है, मामला कोर्ट में जाता न्याय होता, IPS राहुल लोढ़ा ने किस आधार पर ये तय किया कि कोई पत्थरबाज़ी नहीं हुई है.
इसी बात से ख़फा मोहन यादव ने ऐसा आदेश निकाला, IPS की कुर्सी ही चली गई. मंगलवार को CM मोहन यादव से शिकायत की जाती है. देर रात 1 बजे ही आदेश आता है कि रतलाम एसपी को हटाया जाता है. ये भीड़ क्यों बैठी है? आख़िर क्या हुआ था? क्यों गुस्से में बैठी भीड़ CM यादव से मिलना चाहती थी? क्या ये यूपी होता तो ऐसा ही होता? गुजरात के सूरत में अगर पुलिस ऐसा ही दावा करती तो क्या 28 आरोपियों की गिरफ्तारी होती? लखनऊ में तो CM आवास से सिर्फ 11 किलोमीटर दूर चिनहट में एक हिन्दू परिवार को पूजा से रोका गया.
हिन्दू परिवार एक मुस्लिम बहुल कॉलोनी में रहता है, जब शाम में आरती होने लगी तो कुछ युवा पहुंच कर कहते हैं कि पूजा बंद कर दो नहीं तो कोई बचा नहीं पाएगा? यानि जहां कोई हिन्दू परिवार कम हैं वहां पूजा से रोका जा रहा है, गुजरात के कच्छ में एक मंदिर के ऊपर हरा झंडा किसने लगाया? कच्छ में हिन्दू परिवारों के घरों पर हरा झंडा किसने लगाया? रतलाम की घटना साफ दावा करती है कि बिना जांच के ही SSP साहब नतीजें पर पहुंच गए जिसके बाद सीएम मोहन को एक्शन लेना ही पड़ा.
रतलाम में जब हिन्दू पक्ष पर ही बल का प्रयोग किया गया तो वहां भगदड़ मच जाती है....हम आपको SSP राहुल लोढ़ा का दो बयान सुनवाते हैं, एक घटना के दौरान का एक घटना के एक दिन बाद का. दोनों में एसपी की बदली भाषा में कोई ना कोई राज़ छिपा है. ज़रा ध्यान से सुनिए. क्यों मोहन यादव को हटाना पड़ा इसका जवाब आपको मिल जाएगा.
क्या एसएसपी ने ऐसा इसलिए कहा ताकि शहर की शांति बनी रही? अगर ऐसा कहा भी गया तो दूसरे वर्ग की आस्था का क्या? मोहन यादव के CM रहते भी क्या एकतरफा कार्रवाई हो गई? जब उन्हें हटा दिया गया तो लिबरल गैंग का दावा है सरकार ने इसलिए हटवाया क्योंकि वहां दंगा क्यों रोकवाया? होने देते, हमें बुलडोज़र चलवाने का मौका मिलता जबकि सच्चाई ये है कि राहुल लोढ़ा को इसलिए हटाया गया क्योंकि वहां पर एकतरफा कार्रवाई हुई, जिसकी गवाही खुद कलेक्टर भी दे सकते हैं, क्योंकि कलेक्टर से एक पक्ष ने मिलकर राहुल लोढ़ा को हटाने और कार्रवाई की मांग की थी.
मोहन यादव का साफ नारा है, भक्ति में कोई दखल डालेगा तो वो नापा जाएगा, वो अधिकारी हो या सामान्य व्यक्ति कोई बच नहीं सकता है. खैर राहुल लोढ़ा एक अच्छे IPS माने जाते हैं लेकिन उनसे ये भूल क्यों हुई ये हर कोई जानना चाहता है.