2024 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी को अमेठी सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा. हार के बाद पहली बार स्मृति ईरानी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और अपनी हार पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि अमेठी में उनकी हार का विश्लेषण पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर किया गया है, लेकिन उन्होंने इस पर अधिक जानकारी देने से इंकार कर दिया. स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने अमेठी में अपनी पूरी उपस्थिति दर्ज कराई थी, क्योंकि अक्सर यह शिकायत होती थी कि सांसद उपलब्ध नहीं रहते. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने 2014, 2019 और 2024 में पार्टी से टिकट नहीं मांगा था, बल्कि पार्टी ने खुद उन्हें टिकट दिया था.
अमेठी में अपनी हार के बावजूद स्मृति ईरानी ने कहा कि जनता का उन पर विश्वास उनकी असली जीत है. उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे फिर से वापसी करेंगी. यह विश्वास ही उनके लिए सबसे बड़ी जीत है. स्मृति ईरानी ने एक पॉडकास्ट में बताया कि जब वे अमेठी गईं, तो उन्होंने वहां 4 लाख लोगों के लिए घर बनवाए. 3.5 लाख घरों में शौचालय का निर्माण किया गया. उन्होंने बताया कि आजादी के बाद से वहां के 50 गांवों में कोई सड़क नहीं बनी थी, लेकिन उन्होंने उन गांवों में सड़कें बनवाईं. इसके अलावा, उन्होंने 80 हजार लोगों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए और 50 हजार बच्चों को केंद्रीय विद्यालय में दाखिला दिलाने में मदद की.
स्मृति ईरानी ने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी सफलता यही है कि उन्होंने अमेठी के लोगों की सेवा की और उनके जीवन में सुधार लाने के लिए काम किया. जनता के इस विश्वास को उन्होंने अपनी असली जीत माना. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने ये तक कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी भी चुनाव हारे थे. नरेंद्र मोदी ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जो कभी चुनाव नहीं हारे. यही नहीं इस दौरान उन्होंने बदलते राजनीतिक नैरेटिव की भी बात की और कहा कि अब जाति को लेकर जिस तरह से बातें हो रही हैं, वह परेशान करने वाली हैं. स्मृति इरानी आगे कहती हैं कि आज यह विडंबना है कि जाति और गोत्र तक की बातें हो रही हैं. मुझसे लोग पूछते हैं कि आपने तो पारसी से शादी की है. आपके माता और पिता कौन थे. उनकी जाति और गोत्र क्या था.