घाटी में हाई सिक्योरिटी अलर्ट के बीच कुपवाड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या

Amanat Ansari 27 Apr 2025 11:52: AM 2 Mins
घाटी में हाई सिक्योरिटी अलर्ट के बीच कुपवाड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक दुखद घटना सामने आई है. यहां 45 साल के सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम रसूल मागरे को शनिवार देर रात संदिग्ध आतंकियों ने गोली मार दी. यह हमला कुपवाड़ा के कांडी खास इलाके में उनके घर के अंदर हुआ. गुलाम रसूल को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे का मकसद क्या था.

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पूरे कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है. हाल ही में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद से सुरक्षाबल हाई अलर्ट पर हैं. पहलगाम के बैसारन मेडोज, जो एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है, वहां आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी. इस हमले को 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में हुए सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है. पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इसके अलावा, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह कश्मीर में सबसे बड़े हमलों में से एक है.

गुलाम रसूल की हत्या ने एक बार फिर कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोग यह जानना चाहते हैं कि इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद आतंकी इस तरह की वारदात को कैसे अंजाम दे रहे हैं. स्थानीय लोगों में डर और गुस्सा दोनों है. कुछ लोग इसे सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले के रूप में देख रहे हैं, जो समाज में बदलाव के लिए काम कर रहे हैं. गुलाम रसूल सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे और इलाके में उनकी अच्छी पहचान थी.

सुरक्षाबलों ने इस घटना के बाद कांडी खास और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. आतंकियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है, और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है. लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है. अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं.

पहलगाम हमले के बाद से ही कश्मीर में तनाव का माहौल है. पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं. लेकिन गुलाम रसूल की हत्या ने यह सवाल उठाया है कि क्या ये उपाय काफी हैं? लोग अब सरकार और सुरक्षाबलों से और सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.

यह घटना न केवल कश्मीर की सुरक्षा स्थिति को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि आतंकवाद अब भी इस खूबसूरत घाटी के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है. सरकार और सुरक्षाबलों को अब इस दिशा में और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और कश्मीर के लोग बिना डर के जी सकें.

Jammu and Kashmir Kupwara Ghulam Rasool Magrey social worker terrorist attack

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