सोफिया कुरैशी अकेली नहीं है, शहीद इम्तियाज़ भी थे पाक के खिलाफ, देश के दुश्मनों को दिया था मुंहतोड़ जवाब

Rahul Jadaun 13 May 2025 10:01: PM 2 Mins
सोफिया कुरैशी अकेली नहीं है, शहीद इम्तियाज़ भी थे पाक के खिलाफ, देश के दुश्मनों को दिया था मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली:  दोस्तों दो कहानियां मिसाइल की रफ्तार के बीच पीछे रह गई, लेकिन उन्हें सुना जाना चाहिए, एक इम्तियाज़ की है, एक सूरज यादव की है, दोनों का मकसद एक था. राष्ट्र की रक्षा के लिए दोनों शहीद हो गए! सबसे पहले शहीद मोहम्मद इम्तियाज़ा का किस्सा सुनिए!  बिहार के छपरा में एक परिवार है. पिता हबीब मियां ने अपने दो बेटों को सेना में भेजने का सपना देखा था. बड़ा बेटा इम्तियाज़ BSF में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था. दूसरा बेटा मुस्तफा भी BSF में तैनात हैं! हबीब मियां का तीसरा बेटा प्राइवेट नौकरी करता है. इम्तियाज़ ईद की छुट्टी बिताकर 20 अप्रैल को ही लौटे थे! कुछ दिनों पहले पत्नी का एक ऑपरेशन होता है, उनकी ऐसी स्थिति नहीं थी कि वो शहादत की ख़बर को सुन पाए, इसलिए परिवार और समाज ने जैसै-तैसे करके ये बात 24 घण्टे तक छिपाए रखी, लेकिन सत्य को टाला नहीं जा सकता है! लेकिन बेहोशी की हालत में ही पत्नी कुछ कहती है.

मोदी जी, हमारे पति देश की सेवा में शहीद हो गए, हमें गर्व है देश के काम आए, हमारा सुहाग कईयों के सिंदूर का बदला लेकर शहीद हुआ है, हमें गर्व है, मोदी जी पाकिस्तान को नक्शे से मिटा देना! भारत की शांति तभी होगी! 

यहां मौजूद हर एक इंसान भारत माता की जय के नारे लगा रहा था, इसी बीच एक बिहार का मुसलमान पाकिस्तान के नाम एक संदेश जारी करता हैं. ये पाकिस्तानी मुस्लिम हैं जो आतंकियों के लिए फातिहा पढ़ रहे हैं,और ये हिन्दुस्तानी मुसलमान हैं जो शहीद के लिए कुछ ऐसा कहते हैं कि उस वीडियो PM मोदी को अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शहीद इम्तियाज़ा को श्रदांजलि देनी चाहिए

पाकिस्तान तक ये वीडियो वायरल हैं, पाकिस्तान हो या फिर बलूचिस्तान सोफिया कुरैशी, ओवैसी और शहीद इम्तियाज़ा के अंतिम यात्रा की वीडियो वायरल हो रही है, सबसे डराने वाली तस्वीर पाकिस्तान के लिए सोफिया कुरैशी और ओवैसी की नहीं हैं, आम मुसलानों की है...शहीद इम्तियाज़ा के जनाज़े में एकता की मिसाल दिखी...पिता का कंधा बेटे को सहारा देने में झुका तो हिन्दू-मुसलमान एक हो गए! मुसलमानों की जुबान पर राष्ट्र भक्ति के शब्द गूंजने लगे. हालांकि शहादत की कहानी सिर्फ बिहार तक नहीं सिमटी है. यूपी के इटावा के सूरज यादव के परिवार की कहानी भी भावुक है. परिवार का इकलौता बेटा, सेना में राष्ट्र की सेवा कर रहा था. ख़बर आती है. दुर्घटना में सूरज यादव के साथ देश के पांच सैनिक शहीद हो गए!

ये सब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही होता है! सूरज का पार्थिव शरीर पहुंचता है, इटावा समाजवादी पार्टी का गढ़ हैं, लेकिन अखिलेश यादव तो दूर इटावा के सांसद तक नहीं पहुंचे..पिता को ढांढस देने वाले लोगों को अंदाज़ा नहीं था. एक शहीद का पिता कितना मज़बूत होता है! लोग आते हैं, सूरज यादव के पिता को समझाते है, कहते है आप धैर्य रखिए, सब ठीक हो जाएगा! वो कहते हैं चार साल बाद एक और सूरज सेना को दूंगा, यानि पोता सेना ज्वाइन करेगा. हौसला कमज़ोर नहीं होना चाहिए, ये कहानी हमें भावुक करती है लेकिन कमज़ोर नहीं. देश का निर्माण तब होता है जब राष्ट्र पर ख़तरा देख हर धर्म एक हो जाए, एक देश का एक नारा हो जाएगा. भारत माता की जय!

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