नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हालत जंतर मंतर पर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 16वें दिन और बिगड़ गई है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम कम हो गया है. उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल गिरकर 67 mg/dL रह गया है, जबकि ब्लड प्रेशर 107/70 mm Hg दर्ज किया गया.
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार से अपील की कि इस मुद्दे को ‘अहंकार की लड़ाई’ न बनाया जाए. उन्होंने X पर लिखा, ''यहां इंसानी जानें दांव पर हैं. गलती मानना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता, जवाबदेही और सही रास्ते पर लौटने की इच्छा है. हम सिर्फ जवाबदेही मांग रहे हैं.''
यह आंदोलन परीक्षा अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चल रहा है. CJP केंद्र से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा घोटाले में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग कर रहा है. आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था, जबकि वांगचुक 28 जून से इसमें शामिल होकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
सोमवार को AAP की पूर्व दिल्ली सीएम आतिशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और आंदोलन के साथ एकजुटता जताई. CPI(M) सांसद अमरा राम समेत अन्य वरिष्ठ नेता भी वहां पहुंचे और 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च का समर्थन किया.
छात्र संगठन AISA के सदस्य भी अलग मंच पर अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है, लेकिन वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे. 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन जंतर मंतर से संसद तक मार्च निकालने की योजना है, जिसे लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं.