नई दिल्ली: भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी है. मुस्लिम पक्ष मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रहा है, जिसमें विवादित परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर बताया गया था.
सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्या कांत की बेंच ने मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वकील निजाम पाशा की दलीलें सुनीं. वकीलों ने मामले की सुनवाई की तत्काल मांग की. चीफ जस्टिस ने याचिकाओं में पाए गए खामियों को दूर करने को कहा और जल्द ही इसे किसी बेंच के सामने सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया.
15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि धार जिले का भोजशाला-कमाल मौला परिसर देवी सरस्वती का मंदिर है. हाईकोर्ट ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी.
कोर्ट ने यह भी कहा था कि परिसर के प्रशासन और प्रबंधन का फैसला केंद्र सरकार और ASI करेगा. यह परिसर ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है. हिंदू पक्ष इसे राजा भोज काल का सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे 11वीं शताब्दी की कमाल मौला मस्जिद बताता है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. हिंदू पक्ष ने भी शीर्ष अदालत में कैविएट दाखिल कर रखे हैं, ताकि बिना उनकी सुनवाई के कोई आदेश न पारित हो. अब इस प्राचीन विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.