नई दिल्ली: चुनाव आयोग ऑफ इंडिया के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनावी रजनीयों (वोटर लिस्ट) की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को पूरी तरह वैध ठहराया है. कोर्ट ने कहा कि यह अभियान संविधान के मुताबिक मुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराने के लक्ष्य को पूरा करता है. यह फैसला SIR की तीसरे और अंतिम चरण की शुरुआत से ठीक पहले आया है. 30 मई से 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी ताजा सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. बेंच ने जांच की कि क्या चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और संबंधित नियमों के तहत यह अभियान चलाने का अधिकार है. मुख्य न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा, ''हम इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हैं कि SIR का उद्देश्य संविधान के मुताबिक मुक्त और निष्पक्ष चुनावों के लक्ष्य से सीधे जुड़ा हुआ है.''
कोर्ट ने आगे कहा कि SIR मौजूदा चुनाव कानूनों को ओवरराइड नहीं करता, बल्कि अनुच्छेद 324 के तहत दिए गए संवैधानिक दायित्व को मजबूती प्रदान करता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने अपनी वैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण नहीं किया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि SIR को सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि इसकी प्रक्रिया सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है.
विपक्ष को लगा बड़ा झटका
यह फैसला विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका है. उन्होंने SIR की समयिंग और गलत तरीके से नाम काटे जाने के डर को लेकर इसका पुरजोर विरोध किया था. SIR की शुरुआत सबसे पहले बिहार में जून 2025 में हुई थी, जो विधानसभा चुनाव से 5 महीने पहले थी. इस अभियान के बाद बिहार में 60 लाख से ज्यादा नाम (मृतक मतदाताओं सहित) वोटर लिस्ट से हटाए गए. पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले करीब 90 लाख नाम हटाए गए थे.
इस प्रक्रिया के तहत 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में नाम वाले व्यक्तियों से लिंक साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूत मांगे गए थे. शुरुआत में आधार को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जनता को राहत देते हुए आधार कार्ड को भी स्वीकार्य दस्तावेजों में शामिल करने का निर्देश दिया है.
चुनाव आयोग ने विपक्ष के “वोटर दमन” के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि SIR संवैधानिक रूप से जरूरी सत्यापन अभियान है, जिसका मकसद वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखना और गैर-नागरिकों को वोटिंग से रोकना है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से चुनाव आयोग को मजबूत कानूनी समर्थन मिला है और SIR प्रक्रिया अब बिना किसी अड़चन के आगे बढ़ सकेगी.