नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग को बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) के दौरान हटाए गए 65 लाख मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि इस पारदर्शिता से लोग अपनी शिकायतें या सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर मतदाताओं को बड़े पैमाने पर हटाया गया, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा. ड्राफ्ट मतदाता सूची 1 अगस्त को प्रकाशित हुई थी, और अंतिम सूची 30 सितंबर को जारी होगी. विपक्षी दलों का दावा है कि इस प्रक्रिया से लाखों पात्र मतदाताओं के अधिकार छिन सकते हैं.
विवाद बढ़ने पर कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को ऐसी प्रक्रिया करने का अधिकार है, जैसा वह उचित समझे. कोर्ट ने यह भी खारिज कर दिया कि बिहार में SIR का कोई कानूनी आधार नहीं है और इसे रद्द करना चाहिए. यह याचिका RJD, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, NCP (शरद पवार), CPI, SP, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), JMM, CPI (ML), PUCL, ADR और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से दायर की थी, जिसमें 24 जून के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी.