नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणियों के लिए उचित सार्वजनिक माफी जारी न करने के लिए फटकार लगाई और उनकी नीयत और ईमानदारी पर सवाल उठाए. जस्टिस सूर्या कांत ने शाह के वकील से कहा, ''यह व्यक्ति हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है...''
लाइव लॉ अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''पहली तारीख को उन्होंने जो बयान दिया था, वह रिकॉर्ड पर कहां है? उनकी ऑनलाइन माफी उनके इरादों को दर्शाती है, जो हमें उनकी विश्वसनीयता पर और अधिक संदेह पैदा करती है''. जज ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन साझा की गई तथाकथित माफी अपर्याप्त थी और शाह के इरादों पर संदेह पैदा करती थी.
जस्टिस सूर्या कांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंत्री के आचरण के कारण उनकी नीयत और ईमानदारी पर संदेह व्यक्त किया. शाह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने कहा कि एक सार्वजनिक माफी जारी की गई है और इसे अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा. विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 87 लोगों से पूछताछ की है और बयानों की समीक्षा कर रहा है.
अदालत ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर की याचिका, जिसमें शाह के इस्तीफे की मांग की गई थी, पर विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि याचिका में उठाए गए कुछ आरोपों की जांच एसआईटी करेगी. शाह ने मई 2025 में एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी, जो भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर ब्रीफिंग में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, को कथित तौर पर “आतंकवादियों की बहन” कहकर विवाद खड़ा कर दिया था.
इन टिप्पणियों का एक वीडियो क्लिप व्यापक रूप से वायरल हुआ. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बाद में इन टिप्पणियों को ''निंदनीय'' करार दिया और इसे ''गटर की भाषा'' से तुलना की थी. आक्रोश के बाद, शाह के खिलाफ नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को तीन आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठन का आदेश दिया और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अलग-अलग कार्यवाहियों पर रोक लगा दी थी. अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा कि एसआईटी ने एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की है और आरोपी का बयान दर्ज किया गया है.