सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश... दिल्ली के बैरिकेड हटाओ, पुलिस अत्याचार के आरोपों पर जवाब मांगा

Amanat Ansari 11 Oct 2026 12:54 PM 1 Mins
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश... दिल्ली के बैरिकेड हटाओ, पुलिस अत्याचार के आरोपों पर जवाब मांगा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि शहर में लगाए गए बैरिकेड्स को हटाया जाए, जब तक कि वे पूरी तरह जरूरी न हों. अदालत ने स्वतंत्र आवाजाही बहाल करने पर जोर दिया और कथित पुलिस अत्याचार, अवैध हिरासत तथा अन्य प्रतिबंधों पर सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है.

जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने CJP के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों से जुड़े कई याचिकाओं पर सुनवाई की. इनमें मेट्रो स्टेशन बंद करने, इंटरनेट निलंबन, बड़े पैमाने पर हिरासत और वकीलों-पत्रकारों पर कथित हमले के आरोप शामिल हैं.

अदालत के प्रमुख निर्देश

  • बैरिकेड्स हटाए जाएं: अदालत ने कहा कि सभी बैरिकेड्स हटा दिए जाएं, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए वे बिल्कुल जरूरी न हों. स्वतंत्र आवाजाही को सामान्य बनाया जाए.
  • इंटरनेट बंद न हो: अदालत ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट सेवाएं बंद नहीं की जानी चाहिए.
  • हिरासत और अत्याचार पर जवाब: दिल्ली पुलिस, गृह सचिव और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर कथित अवैध हिरासत, वकीलों
  • मीडियाकर्मियों पर कार्रवाई और पुलिस excesses के आरोपों पर जवाब मांगा गया.
  • मेट्रो-ट्रेन सेवाएं: अदालत ने पहले के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मेट्रो और ट्रेन सेवाएं नियंत्रित तरीके से चालू रहनी चाहिए.
    सरकार ने अदालत को बताया कि इंटरनेट सेवाएं बहाल हो चुकी हैं और मेट्रो सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो गई हैं.

याचिकाओं में क्या आरोप?

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर भी लोगों को हिरासत में लिया, वकीलों और पत्रकारों के साथ बदसलूकी की तथा आम नागरिकों की आवाजाही को अनावश्यक रूप से बाधित किया. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी वकीलों के खिलाफ कथित कार्रवाई की जांच की मांग की है. अदालत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन वह पुलिस अधिनियम के दायरे में होना चाहिए. सुनवाई जारी है और आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं.

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