नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर के घर पर चल रही प्रार्थना सभाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि इन सभाओं की आड़ में अवैध रूप से लोगों का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की जा रही थी.
पुलिस के अनुसार, अंबिकापुर के नमनकला इलाके में ओमेगा टोप्पो (66 वर्षीय) नाम की रिटायर्ड अधिकारी अपने आवास पर पिछले लगभग एक साल से हर रविवार को 'चंगाई सभा' का आयोजन कर रही थीं. इन सभाओं में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते थे. हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि 26 जनवरी को आयोजित एक ऐसी ही सभा में हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं और लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाया गया. उनका कहना है कि उस दिन चार-पांच लोगों को मतांतरित करने की तैयारी चल रही थी.
संगठनों से जुड़े रोशन तिवारी ने गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई. सूचना मिलते ही पुलिस और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे, लेकिन आयोजकों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. उन्होंने कहा कि प्रार्थना चल रही है, इसलिए जांच बाद में हो. पुलिस को एक रजिस्टर दिखाया गया, जिसमें उपस्थित लोगों के नाम और हस्ताक्षर दर्ज थे, जिसे जब्त कर लिया गया. जांच में पता चला कि इन सभाओं के लिए कोई प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी.
इस आधार पर पुलिस ने ओमेगा टोप्पो और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 270, 299 तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 5(क) के तहत मामला दर्ज किया. पूछताछ के लिए थाने बुलाए जाने पर ओमेगा टोप्पो वहां से चली गईं. बाद में गुप्त सूचना पर पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है, जिसमें अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका और सभाओं के दौरान हुई गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है. यह घटना छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता कानून के तहत धार्मिक प्रलोभन और अवैध मतांतरण के आरोपों से जुड़े मामलों की श्रृंखला में एक और कड़ी है.