कोलकाता :, पश्चिम बंगाल सरकार ने धार्मिक स्थलों पर बजने वाले लाउडस्पीकरों की आवाज को लेकर सख्त लेकिन संतुलित रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक बैठक में पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंदिर, मस्जिद या किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर की आवाज तय ध्वनि सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि कार्रवाई का तरीका सख्ती या टकराव नहीं, बल्कि बातचीत और समझाइश होना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन आम नागरिकों की शांति और सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि रोजाना तेज आवाज में धार्मिक प्रसारण होने से छात्रों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और कामकाजी नागरिकों को परेशानी होती है. इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि माइक की आवाज धार्मिक परिसर से बाहर अत्यधिक स्तर तक न पहुंचे.
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि दुर्गापूजा, ईद और अन्य बड़े त्योहारों के दौरान विशेष परिस्थितियां होती हैं. ऐसे आयोजनों को सामान्य दिनों से अलग नजरिए से देखा जाएगा. हालांकि, नियमित रूप से तेज ध्वनि में लाउडस्पीकर बजाना स्वीकार्य नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि यदि कहीं ध्वनि सीमा का उल्लंघन हो रहा हो, तो संबंधित संस्था या लोगों से संवाद स्थापित किया जाए.
किसी भी स्थिति में बल प्रयोग, तनाव या विवाद की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए. सरकार चाहती है कि सामुदायिक सहयोग और आपसी समझदारी से इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान निकाला जाए. राज्य सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब कई शहरों और कस्बों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं. खासकर सुबह और देर रात बजने वाले लाउडस्पीकरों से स्थानीय लोग परेशान हैं. सरकार का मानना है कि नियमों का पालन और धार्मिक भावनाओं का सम्मान साथ-साथ संभव है.