अचानक योगी के बुलडोज़र से मचाया गदर! बागपत में अवैध मस्जिद की कहानी क्या है?

Abhishek Shandilya 10 Nov 2024 03:21: PM 2 Mins
अचानक योगी के बुलडोज़र से मचाया गदर! बागपत में अवैध मस्जिद की कहानी क्या है?

हिमाचल के संजौली और उत्तराखण्ड के उत्तराकाशी के बाद नया विवाद UP के बागपत का है. दिल्ली से कुछ दूर  एक जिला बागपत है...वहां हिन्दू-मुसलमानों की आबादी एक जैसी है. करीब 1975 में बनी एक मस्जिद का मामला कोर्ट में जाता है, लेकिन 50 साल बाद जब जज साहब फैसला पढ़ते हैं तो सबकी आंखें फटी की फटी रह जाती है. पूरा मामला समझिए फिर आपको जज साहब की टिप्पणी सुनवाते हैं, फिर बताते हैं कि क्या योगी का बुलडोज़र बागपत में कहर बरपाएगा.

  • बागपत के राजपुर-खामपुर में करीब 50 साल पहले एक मस्जिद बनी थी. उन दिनों UP में और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी...
  • राजपुर-खामपुर गांव के ही निवासी गुलशेर ने कार्रवाई के लिए जुलाई 2024 में हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी.
  • 2019 में भी गुलशेर ने बागपत प्रशासन से कार्रवाई की मांग की लेकिन प्रशासन नहीं चेता. UP हाईकोर्ट के आदेश पर जांच हुई.
  • दलीलें पेश हुई, जज साहब ने 90 दिनों में डीएम साहब को जांच करने के लिए कहा, SDM की निगरानी में तहसीलदार पैमाइश करते हैं.
  • अब खुलती है पोल...पचास साल पहले गांव के तालाब पर कुछ लोगों ने पहले कब्जा किया, फिर देखते ही देखते वहां मस्जिद बन गई.

एक मौलाना ने तालाब पर कब्जा किया, फिर उसी तालाब के आस-पास कई मकान बने, जिसमें मौलवी का साथ था...कोर्ट में मामला चल रहा था...दस्तावेज जमा हुए तो जो आदेश आया उसको सुनिए.....ये फैसला तहसीलदार कोर्ट से आया है. DM के आदेश पर तहसीलदार कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मस्जिद के पेपर या फिर कोई और साक्ष्य नहीं हैं...ये इमारत पूरी तरह से अवैध है. गुलशेर की रिपोर्ट एकदम सही निकली...और तथ्यों पर तहसीलदार कोर्ट फैसला सुनाती है. जिसमें लिखा गया है...

सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिद को हटाना होगा. इस मस्जिद के संरक्षक पर 4 लाख 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है. साथ ही मुकदमे का पूरा खर्चा जो कि करीब 5 हजार रुपये है, वो भी मस्जिद के संरक्षक को जुर्माने के तौर पर देना होगा…मस्जिद अवैध है, क्योंकि तालाब पर बनी है. 

राजपुर-खामपुर गांव में मुस्लिम आबादी ज्यादा है...बागपत में मौलाना भी टेंशन में है, लेकिन सच ये है कि बिना पेपर के कोई ईमारत या धार्मिक स्थल कहीं खड़ी नहीं की जा सकती है. इसपर अब दो रास्ते बचते हैं, पहला खुद संजौली की तरह मस्जिद को हटाए या फिर बुलडोज़र कार्रवाई के तहत हटाया जाए, यानि आने वाले कुछ दिनों में आप बागपत की सच्चाई को टीवी पर देख सकते हैं. बवाल होना तय है. मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट में भी जा सकता है, लेकिन जब पेपर्स ही नहीं है तो वहां जाकर भी क्या मिलेगा? अब आप समझिए कि गांव में क्या चल रहा है? और इसमें योगी के आदेश ने कैसे काम किया? दरअसल योगी सरकार का आदेश हैं कि गांव में तालाबों पर कब्जा, सरकारी जमीन पर कब्जा, और अवैध कब्जे को मुक्त करवाना होगा...

यही कारण है कि अब फैसला आने के बाद बुलडोज़र कार्रवाई हो सकती है. हालांकि मौलवी मानने को तैयार नहीं हैं, उनका कहना है कि योगी सरकार बदले का भाव रखती है, इसलिए एकतरफा कार्रवाई कर रही है? हालांकि इस घटना का सच इतना ही नहीं है. योगी बेशक महाराष्ट्र चुनाव में व्यस्त हैं...लेकिन इधर उनकी टीम लगातार एक्शन ले रही है. UP में 25 हज़ार मदरसे हैं, उसमें से भी हज़ारों ऐसे हैं जो तालाब की जमीन पर बने हैं, तालाब की जमीन कब्जा करना पहले सबसे आसान था...इसलिए सालों पहले तालाब पर ना जाने किसने-किसने अवैध निर्माण किए, अब पोल खुल रही है तो मौलाना क्यों भड़क रहे हैं ये बात समझ से परे है.

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