नई दिल्ली: इन दिनों एक 'छोटा लड़का' पूरे भारत और दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इसे हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इसके चलते 2026 में देश को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. यह 'छोटा लड़का' कोई इंसान नहीं, बल्कि मौसम की एक प्रसिद्ध घटना अल नीनो है, जिसे स्पेनिश भाषा में 'द लिटिल बॉय' भी कहा जाता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इसकी वजह से 2026 के मानसून को लेकर चेतावनी जारी की है.
मौसम विभाग की चिंता क्या है?
IMD के अनुसार, वर्ष 2026 में जून से सितंबर तक होने वाली मानसूनी बारिश औसत से कम रहने की संभावना है. इसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में अल नीनो का बनना और मजबूत होना बताया जा रहा है. अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य भाग का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. इससे वैश्विक मौसम व्यवस्था प्रभावित होती है और कई जगहों पर बारिश की मात्रा घट जाती है.
भारत पर कैसा रहेगा असर?
सामान्य परिस्थितियों में गर्म हवाएं समुद्र से नमी लेकर भारत की ओर आती हैं और जुलाई-सितंबर के दौरान भारी बारिश कराती हैं. लेकिन अल नीनो सक्रिय होने पर ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. नतीजतन, मानसून अपनी रफ्तार खो देता है और बारिश काफी कम हो जाती है. भारत में कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मानसून से ही आता है. यह बारिश देश की कृषि के लिए बेहद जरूरी है. कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में करीब 18 प्रतिशत योगदान देता है और 150 करोड़ से ज्यादा लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
भारत के लिए अच्छा नहीं इतिहास
पिछले कई दशकों में भारत ने अल नीनो की कई घटनाओं का सामना किया है. इनमें से ज्यादातर मामलों में बारिश औसत से कम दर्ज की गई. आखिरी छह अल नीनो वाले वर्षों में हर बार भारत में औसत से कम बारिश हुई. सबसे खराब स्थिति 2009 में देखी गई, जब बारिश मात्र 78.2 प्रतिशत ही हुई थी, जो पिछले 37 सालों का सबसे निचला स्तर था.
मौजूदा वैज्ञानिक मॉडल्स के अनुसार, 2026 में अल नीनो काफी ताकतवर हो सकता है, जिससे मानसून पर और ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. इसी बीच, गुरुवार को राजधानी दिल्ली का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जो गर्मी के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है. अल नीनो छोटे से क्षेत्र में पैदा होता है, लेकिन इसका प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर तक फैलता है. मौसम विशेषज्ञ इसे लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि इससे सूखा, फसल उत्पादन में कमी और खाद्यान्न सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. किसानों को लगातार सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.