कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के विवादास्पद पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का शिकंजा कस गया है. राज्य सरकार ने उनके खिलाफ केस चलाने की औपचारिक मंजूरी दे दी है. ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी. आरोप है कि घोष ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अस्पताल में ठेकों, खरीद प्रक्रिया और टेंडर में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया.
कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने, नियमों का उल्लंघन करने और रिश्वत लेने का मामला सामने आया है. डॉ. संदीप घोष का नाम अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई महिला ट्रेनी डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की जघन्य घटना के बाद सुर्खियों में आया था. दावा किया गया था उस समय की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संदीप घोष को बचा रही थी.
उस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन पर भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ियों और साक्ष्य छिपाने के गंभीर आरोप लगे. सीबीआई और ईडी ने अलग-अलग जांच में पाया कि मेडिकल उपकरणों, सामानों की खरीद और ठेकों में अनियमितताएं हुईं.
अब शुभेंदु सरकार के फैसले के बाद जांच एजेंसियां अदालत में मजबूती से मुकदमा लड़ सकेंगी. सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ऐसी मंजूरी अनिवार्य होती है. यह डवलपमेंट पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवालों को और गहरा करता है. मामले पर नजर रखे हुए लोग इसे न्याय की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं.