वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है. ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए लिबरेशन डे टैरिफ के तहत वसूले गए करीब 100 अरब अमेरिकी डॉलर का रिफंड प्रोसेस कर लिया गया है. यह रकम उन आयातक कंपनियों को वापस की जा रही है, जिन्होंने ये शुल्क चुकाए थे.
अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) की ओर से अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर याचिका के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक लगभग 100 अरब डॉलर (शुल्क और ब्याज सहित) का रिफंड पूरा हो चुका है. इसे CBP ने प्रमाणित कर अमेरिकी वित्त विभाग को वितरण के लिए भेज दिया है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ये टैरिफ अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए थे. फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि IEEPA राष्ट्रपति को व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता.
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखी. कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के पास लगभग सभी व्यापारिक साझेदारों से आने वाले सामानों पर ऐसे शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है. कुल मिलाकर इन टैरिफ से करीब 166 अरब डॉलर जमा हुए थे. अब तक 100 अरब डॉलर से ज्यादा का रिफंड हो चुका है, जो कुल राशि का आधे से ज्यादा है.
रिफंड कैसे हो रहा है?
CBP ने अपने ऑटोमेटेड कमर्शियल एनवायरनमेंट (ACE) प्लेटफॉर्म में नई प्रणाली विकसित की. ‘CAPE’ नाम की सुविधा अप्रैल 2026 से उपलब्ध है. 31 जुलाई तक 2.52 लाख से ज्यादा आवेदन जमा हुए, जिनमें से 1.78 लाख सफल रहे. लगभग 128.68 अरब डॉलर के संभावित रिफंड स्वीकार किए गए. यह एजेंसी के इतिहास में टैरिफ रिफंड की सबसे बड़ी कोशिशों में से एक है.
कई बड़ी कंपनियों को पहले ही अरबों डॉलर वापस मिल चुके हैं. ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति के केंद्र में रहे ये टैरिफ अब कानूनी चुनौती के बाद वापसी का सामना कर रहे हैं. इससे अमेरिका की राजकोषीय स्थिति पर भी असर पड़ने की चर्चा है.