Turmoil in Kerala Congress over CM post: पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी सियासी परीक्षा अब केरल में आ खड़ी हुई है. लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाने के बावजूद पार्टी अंदर ही अंदर तनाव झेल रही है.
मुख्यमंत्री पद को लेकर तीन प्रमुख दावेदारों, वी.डी. सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच खुली खींचतान शुरू हो गई है. समर्थकों के बीच यह प्रतिस्पर्धा सड़कों तक पहुंच गई थी. जगह-जगह फ्लेक्स, पोस्टर और प्रदर्शन नजर आने लगे थे, जिससे पार्टी में अस्थिरता के संकेत मिल रहे थे.
दिल्ली में हुई अहम बैठक
स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने तुरंत कदम उठाया. दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर करीब तीन घंटे तक चली उच्चस्तरीय बैठक में राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए. बैठक में केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला, वी.डी. सतीशन, सनी जोसेफ, अजय माकन, मुकुल वासनिक और दीपा दासमुंशी मौजूद रहे. हालांकि बैठक के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका.
सभी नेताओं ने एकमत से यह स्वीकार किया कि आखिरी फैसला पार्टी आलाकमान ही करेगा और सब उसका सम्मान करेंगे. राहुल गांधी और खरगे ने तीनों दावेदारों से अलग-अलग बातचीत कर पार्टी अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया.
क्या कहते हैं दावेदार?
रमेश चेन्निथला ने बैठक के बाद कहा कि मुख्यमंत्री का चयन आलाकमान करेगा और जल्द ही ऐलान हो जाएगा. दीपा दासमुंशी ने बताया कि 23 मई तक सरकार गठन की समयसीमा है, इसलिए फैसला शीघ्र आने वाला है. विधायकों ने भी प्रस्ताव पास कर आलाकमान को पूर्ण अधिकार दे दिया है.
सड़कों पर प्रदर्शन थमे
नेताओं की अपील के बाद केरल के विभिन्न जिलों (तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, त्रिशूर, कन्नूर आदि) में लगे पोस्टर और फ्लेक्स बोर्ड हटा दिए गए. कुछ जगहों पर प्रस्तावित रैलियां भी रद्द कर दी गईं. पार्टी के वरिष्ठ नेता के.सी. जोसेफ ने चेतावनी दी कि आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक रूप देना संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.
तीनों दावेदार कौन हैं?
चुनौती सिर्फ केरल तक नहीं
UDF ने केरल में शानदार वापसी की है. 140 सीटों में से गठबंधन को 102 सीटें मिली हैं, जिनमें कांग्रेस अकेले 63 सीटें जीतने में सफल रही. केरल के अलावा कर्नाटक में भी डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच पहले से ही नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है. ऐसे में कांग्रेस के सामने सत्ता हासिल करने से ज्यादा मुश्किल सत्ता में संतुलन बनाए रखने की है. अभी यह साफ नहीं है कि आलाकमान अंत में किसके नाम पर मुहर लगाएगा, लेकिन फैसला किसी भी वक्त आ सकता है.