नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिरासत की कार्रवाई पर अब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने चिंता जताई है. आयोग ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने और संयम बरतने की अपील की है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ''दिल्ली में आज हो रहे बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, सिविल सोसाइटी संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों से हमें चिंता है. हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान करें और उसे सुनिश्चित करें.''
आयोग ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता की कड़ी कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए. भारतीय अधिकारियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति बहुत संयम बरतें, जो देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों से जुड़ी जिम्मेदारियों के अनुरूप हो.
बयान में आगे कहा गया, ''जिन लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए. हम अधिकारियों से यह भी आग्रह करते हैं कि वे लोगों की व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक बातचीत करें.'' CJP के प्रदर्शन के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया था. आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर लोगों को 10-12 किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ दिया गया है.
अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे नेताओं को भी रिहा कर दिया गया है. हालांकि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे नेताओं की स्थिति अभी साफ नहीं है. CJP ने रविवार को एक बार फिर से प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था.