नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की निगरानी प्रणाली के अंदर से चल रहे एक ब्लैकमेल रैकेट ने बर्खास्तगी, गिरफ्तारियां और पुलिस जांच की झड़ी लगा दी है. कर्मचारियों ने यात्रियों के निजी पलों की CCTV फुटेज निकालकर पैसे वसूलने का काम किया था.
असिस्टेंट मैनेजर और ट्रैफिक मैनेजर बर्खास्त
गुरुवार को एक्सप्रेसवे के पैकेज-3 पर तैनात ट्रैफिक मैनेजर को बर्खास्त कर दिया गया. इससे पहले असिस्टेंट मैनेजर आशुतोष सरकार को हटा दिया गया था, क्योंकि प्रोजेक्ट अथॉरिटी ने “एंटी-ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) से वीडियो कंटेंट का अनधिकृत लीक” होने की रिपोर्ट दी थी. ऑपरेटर कंपनी SCIPL सुपरवेव कम्युनिकेशन एंड इंफ्रा सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने अब कुल चार कर्मचारियों को हटा दिया है– असिस्टेंट मैनेजर, ट्रैफिक मैनेजर शशांक शेखर, एक सिस्टम टेक्नीशियन और एक सिस्टम इंजीनियर. आंतरिक जांच में ATMS फुटेज के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है.
मामला कैसे सामने आया
यह गड़बड़ तब उजागर हुई जब कपल्स और नवविवाहित जोड़ों की CCTV क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. ये वीडियोज़ ATMS के उन कैमरों से निकाली गई थीं, जिनका मकसद केवल वाहनों की स्पीड मॉनिटर करना और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना था, लेकिन इनमें चलती गाड़ियों के अंदर के निजी पल कैद हो गए थे.
मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची शिकायत के अनुसार, कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी CCTV स्क्रीन पर ज़ूम करके अंतरंग पलों को रिकॉर्ड करते थे, फिर संबंधित गाड़ी का पीछा करके यात्रियों को वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे वसूलते थे. पैसे लेने के बाद भी कई वीडियो ऑनलाइन डाल दिए गए. CCTV लॉग और डिवाइस रिकॉर्ड की प्रारंभिक जांच से पता चला कि महीनों से इस तरह की फुटेज बार-बार एक्सेस की जा रही थी.
पुलिस केस दर्ज, तीन गिरफ्तार
मामला राज्य प्रशासन तक पहुंचते ही पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया. चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इनमें से तीन – असिस्टेंट मैनेजर आशुतोष सरकार, टेक्नीशियन अभिषेक तिवारी और सिस्टम इंजीनियर प्रमोद पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है. ट्रैफिक मैनेजर शशांक शेखर, जिस पर वीडियो ऑनलाइन सर्कुलेट करने का आरोप है, फरार है.
पुछताछ में आशुतोष सरकार ने कथित तौर पर बताया कि पिछले ढाई साल में ऐसी रिकॉर्डिंग “हजारों बार” की गई, लेकिन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुई थी.
अन्य आरोप और लोगों में दहशत
ऑनलाइन घूम रही एक अलग शिकायत में एक व्हिसलब्लोअर ने दावा किया है कि एक्सप्रेसवे के साथ लगते खेतों के पास से गुजर रही महिलाओं की भी वीडियो बनाई गई और लीक की गई. कंपनी ने इन विशेष आरोपों को खारिज किया है, लेकिन कंट्रोल रूम के अंदर निगरानी बढ़ा दी गई है और जांच जारी है. एक्सप्रेसवे के आसपास के स्थानीय लोग अब डर महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरे अब निजता पर हमला लगते हैं और इनकी कोई ठोस निगरानी नहीं है.