लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग द्वारा जारी एक विवादास्पद आदेश पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह आदेश ग्रामसभा की भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई को जाति विशेष (यादव) और धर्म विशेष (मुस्लिम) से जोड़कर निर्देशित करता था, जिसे मुख्यमंत्री ने "पूर्णतः भेदभावपूर्ण और अस्वीकार्य" करार दिया.
मुख्यमंत्री ने इस आदेश को तत्काल रद्द करने के निर्देश दिए और इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा और सोच न केवल राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ है, बल्कि समाज में विभाजन को बढ़ावा देने वाली है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पंचायती राज विभाग के इस आदेश ने सोशल मीडिया और स्थानीय समुदायों में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया था, जिसमें इसे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि सरकार सभी समुदायों के प्रति निष्पक्षता और समानता के सिद्धांत पर काम करती है, और इस तरह के आदेश सामाजिक एकता के लिए खतरा हैं.
एसएन सिंह के निलंबन के साथ ही इस मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह का आदेश कैसे और क्यों जारी किया गया. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही या भेदभावपूर्ण कार्रवाई को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे.
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासनिक सुशासन और सामाजिक समरसता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है, साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए और सख्त कदमों की मांग की है.