लखनऊ : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है पीसीएस अधिकारी बृजेश सिंह. जनता की समस्या उठाने पहुंचे एक पार्षद को कथित तौर पर उठवा लेने की धमकी देने वाला वीडियो वायरल हुआ तो मामला सीधे शासन तक पहुंच गया. विवाद बढ़ा तो सरकार ने कार्रवाई करते हुए एडीएम सिटी बृजेश सिंह का तबादला सीतापुर कर दिया, लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब आदेश जारी होने के बाद भी साहब ने कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया.
करीब एक सप्ताह तक प्रशासनिक गलियारों में जबरदस्त खींचतान चलती रही. बताया जाता है कि तबादले के बावजूद बृजेश सिंह लगातार अपने पद पर बने रहे और फाइलों पर काम करते रहे. इस दौरान सत्ता और सिस्टम के भीतर कई स्तर पर बातचीत चली. आखिरकार मामला ऐसा पलटा कि शासन को भी बैकफुट पर आना पड़ा और तबादले को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई.
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा था कि आखिर एक अधिकारी में इतनी ताकत कहां से आती है कि वह जनप्रतिनिधियों को धमका भी दे और फिर ट्रांसफर आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाल दे. स्थानीय राजनीति से लेकर लखनऊ तक यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.
सोशल मीडिया पर लोग इसे अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि की लड़ाई बता रहे हैं. कई यूजर्स लिख रहे हैं कि अगर एक एडीएम स्तर का अधिकारी तबादला रुकवा सकता है, तो सिस्टम में उसकी पकड़ कितनी मजबूत होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.