नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पटना स्थित निवास पर बुधवार शाम पारंपरिक लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन किया था, जिसमें कई राजनीतिक हस्तियां और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए. लेकिन पार्टी के चार विधायकों में से तीन की अनुपस्थिति ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है.
आरएलएम के कुल चार विधायक हैं, उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा सहित. शेष तीन विधायक मदुबनी से माधव आनंद, रोहतास के दिनारा से आलोक सिंह और काराकाट से रामेश्वर महतो इस आयोजन में नहीं पहुंचे. इनकी गैर-मौजूदगी को पार्टी में चल रही आंतरिक असंतोष की निशानी के रूप में देखा जा रहा है.
इससे भी दिलचस्प बात यह सामने आई कि ये तीनों विधायक उस दिन दिल्ली में थे और उन्होंने वहां भाजपा के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा (नितिन नवीन के स्थान पर सही नाम) से मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीरें विधायक रामेश्वर महतो ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा कीं, जिसमें उन्होंने इसे शिष्टाचार भेंट और बधाई संदेश बताया. पोस्ट में उन्होंने लिखा कि नए पद की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाने की शुभकामनाएं दी गईं.
हालांकि भाजपा की ओर से इसे सामान्य औपचारिक मुलाकात करार दिया गया है, लेकिन बिहार की सियासत में इस घटना को आरएलएम में संभावित विद्रोह या दल-बदल की आहट के तौर पर व्याख्या किया जा रहा है. खासकर तब जब रामेश्वर महतो पहले भी सोशल मीडिया के जरिए पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं.
सूत्र बताते हैं कि पार्टी में मंत्रिमंडल विस्तार और पदों के बंटवारे को लेकर भी असंतोष चल रहा है, जिसने विधायकों के बीच दूरी को और बढ़ाया है. आरएलएम नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में बिहार एनडीए गठबंधन में यह मामला नई बहस छेड़ सकता है.