वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कसम खाई कि वे ईरान पर इतना भारी बमबारी करेंगे कि उसे पाषाण युग में भेज देंगे. इसके लिए अब अमेरिका अपने सबसे घातक लंबी दूरी की हथियारों को ईरानी ठिकानों पर हमला करने के लिए तैयार कर रहा है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अभियान के अगले चरण में दुनिया भर में तैनात स्टॉक से लगभग पूरी JASSM-ER (जॉइंट एयर-टू-सर्फेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज) क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा. JASSM-ER मिसाइल 600 मील (965 किलोमीटर) से भी ज्यादा दूर के लक्ष्यों को मार सकती है और दुश्मन की हवाई रक्षा से बचने के लिए काफी दूरी से हमला करने के लिए डिज़ाइन की गई है.
लंबी दूरी की हथियारों को नई जगह पर तैनात किया जा रहा है
मार्च के अंत में प्रशांत क्षेत्र के स्टॉक से इन करीब 15 लाख डॉलर वाली मिसाइलों को निकालने का आदेश जारी किया गया. अमेरिकी भूमि सहित विभिन्न ठिकानों से मिसाइलों को यूएस सेंट्रल कमांड के बेस और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस पर भेजा जा रहा है. ट्रंप के दबाव के बाद ब्रिटेन ने ईरान अभियान के लिए अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. एक्सटेंडेड रेंज वाली मिसाइलों के साथ-साथ छोटी रेंज वाली JASSM मिसाइलों (लगभग 250 मील / 402 किमी रेंज) का भी करीब दो-तिहाई हिस्सा ईरान युद्ध के लिए कमिट कर दिया गया है.
अमेरिका ने अपने सैनिकों को जोखिम से बचाने के लिए स्टैंडऑफ हथियारों (दूरी से मार करने वाले) पर बहुत ज्यादा भरोसा किया है, लेकिन इस रणनीति से चीन जैसे मजबूत विरोधियों से संभावित टकराव के लिए रखे गए स्टॉक काफी कम हो गए हैं.
इससे पहले वाशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम के कुछ हिस्सों को मध्य पूर्व भेजा जा रहा है, क्योंकि ईरान ने जॉर्डन में एक अमेरिकी सहयोगी एयरबेस पर 30 करोड़ डॉलर की एक इंटरसेप्टर मिसाइल को नष्ट कर दिया था. ईरान के खिलाफ इस घिसापिटी लड़ाई में लंबी दूरी के हथियारों का भारी इस्तेमाल अमेरिकी स्टॉक पर दबाव डाल रहा है.
मिसाइल स्टॉक पर दबाव
यूएस सेंट्रल कमांड के इस सप्ताह के अपडेट के अनुसार, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने ईरान में 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें नौसैनिक जहाज, मिसाइल लॉन्चर और रक्षा निर्माण सुविधाएं शामिल हैं. युद्ध के पहले चार हफ्तों में ही अमेरिकी अभियानों में 1,000 से ज्यादा JASSM-ER मिसाइलें खर्च हो चुकी हैं. नए रीडिप्लॉयमेंट के बाद दुनिया भर में केवल करीब 425 मिसाइलें ही बची रहेंगी, जबकि युद्ध से पहले इनकी कुल संख्या लगभग 2,300 थी.
इसके अलावा करीब 75 मिसाइलें क्षतिग्रस्त या तकनीकी खराबी के कारण अप्रयोग योग्य घोषित कर दी गई हैं. वर्तमान उत्पादन दर पर मिसाइल इंटरसेप्टर और स्ट्राइक सिस्टम के स्टॉक को फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं. लेकिन अब अमेरिका सुरक्षित खेल नहीं खेल सकता. ईरानी हवाई क्षेत्र में अपने दो सैन्य विमानों के खो जाने से अमेरिका शर्मिंदा और झुंझलाया हुआ है.
युद्धक्षेत्र में लगे कई झटके
ट्रंप के हवाई श्रेष्ठता के दावों को चोट पहुंचाते हुए, ईरान ने इस सप्ताह एक F-15E स्ट्राइक फाइटर और एक A-10 अटैक एयरक्राफ्ट को मार गिराया. इसके बाद सर्च-एंड-रिस्क्यू ऑपरेशन में लगे दो ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टरों पर भी हमला किया. तेहरान ने युद्ध शुरू होने से अब तक एक दर्जन से ज्यादा MQ-9 ड्रोन्स भी नष्ट कर दिए हैं. अमेरिका और इजराइल के दावों के बावजूद कि ईरान की हवाई रक्षा व्यवस्था काफी हद तक कमजोर हो चुकी है, ये नुकसान दिखाते हैं कि तेहरान अभी भी कुछ तुरुप के पत्ते छिपाकर रखा है. वह Manned एयरक्राफ्ट के लिए अभी भी बड़ा खतरा बना हुआ है.
हालांकि बड़ी संख्या में JASSM-ER मिसाइलों को कमिट करना यह नहीं दिखाता है कि सभी का इस्तेमाल होगा, लेकिन इन्हें पहले ही B-52 और B-1B बॉम्बरों तथा स्ट्राइक फाइटरों से लॉन्च किया जा चुका है, जो एक लंबे और संसाधन-गहन हवाई अभियान का संकेत देता है. अमेरिका का ईरान के खिलाफ युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक चरण में प्रवेश करने वाला है.