वाशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को एक बड़ा और विवादास्पद बिल पास कर दिया है, जो रूस और चीन समेत रूसी ऊर्जा के सबसे बड़े खरीदार देशों पर सीधा निशाना साधता है. 86-11 के भारी मतों से पारित इस बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ रखा गया है.
इस बिल के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जो रूस के तेल और गैस के टॉप-5 आयातक देशों में शामिल हैं. फिलहाल चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया इस सूची में हैं. बिल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ओलिगार्क्स और वित्तीय संस्थानों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है. साथ ही ईरान सैंक्शंस एक्ट को 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है.
बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जिनकी 11 जुलाई को मृत्यु हो गई) और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर आगे बढ़ाया था. ग्राहम की बहन डार्लिन ग्राहम, जिन्हें उनकी सीट दी गई है, ने कहा, “यह बिल उन मुख्य देशों को मजबूर करेगा जो रूस की अर्थव्यवस्था को जिंदा रखे हुए हैं. उन्हें अमेरिका के साथ व्यापार या सस्ते रूसी ऊर्जा में से एक चुनना होगा.”
ब्लूमेंथल ने वोट के बाद कहा कि ग्राहम इस पर गर्व महसूस करते. उन्होंने कहा कि ये सख्त प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोकेंगे जो यूक्रेन के खिलाफ इस युद्ध में शामिल हैं. हालांकि कुछ डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी है कि यह बिल ट्रंप को नए टैरिफ पावर देगा, जिसका वे पहले भी इस्तेमाल कर चुके हैं.
कांग्रेस सदस्यों ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने कहा कि यह बिल रूस को जवाबदेह बनाने के बजाय ट्रंप को और टैरिफ लगाने का मौका देगा, जिसका खामियाजा अमेरिकियों को भुगतना पड़ेगा. अब यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा, जो 31 अगस्त को दोबारा बैठक करेगा. अगर हाउस भी इसे मंजूरी दे देता है तो भारत सहित कई देशों के अमेरिकी व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है.