तिरुपति के प्रसाद (Tirupati Laddu Controversy) में जानवरों की चर्बी, जानवरों का फैट (Animal Fat) और फिश ऑयल होने का दावा आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (CM Chandrababu Naidu) द्वारा किया गया. जिसके बाद से मंदिर की पवित्रता और लोगों की आस्था पर ठेस पहुंची. इस बीच मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं (Devotees) ने प्रसाद के बारे में बात की और उनका कहना है कि यह पूरी तरह से शुद्ध है.
यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस पर विश्व हिंदू परिषद ने गुस्सा जाहिर किया है. मामले को लेकर अयोध्या (Ayodhya) के संतों में भी खासा नाराज़गी है....गौरतलब है कि रामलला (Ramlala) की प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha) में भी तिरुपति से प्रसाद आया था. ऐसे में संतों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए अपराधी को कठोर सजा देने की मांग की है.
बता दें कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआरसीपी पर भगवान बालाजी के प्रसाद में 'पशु चर्बी' के इस्तेमाल का आरोप लगाया है, जिसके बाद राज्य सहित देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. 19 सितंबर को टीडीपी प्रवक्ता ने लैब रिपोर्ट का ब्योरा साझा करते हुए कहा कि "लैब रिपोर्ट प्रमाणित करती है कि गोमांस की चर्बी और पशु चर्बी-लार्ड और मछली के तेल का इस्तेमाल किया गया था.
इस मुद्दे पर बोलते हुए टीटीडी बोर्ड के पूर्व सदस्य भानुप्रकाश रेड्डी ने बताया कि जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा रही है. टीडीपी की लैब रिपोर्ट के आरोपों के बाद विवाद बढ़ने पर पूर्व टीटीडी अध्यक्ष और वाईएसआरसीपी नेता वाईवी सुब्बा रेड्डी ने इन आरोपों का खंडन किया और इन्हें "निराधार" कहा.
इस बीच, तिरुपति मंदिर में 'लड्डू प्रसादम' पर बोलते हुए भक्तों ने कहा कि टीडीपी के शासन में लड्डू की गुणवत्ता में सुधार हुआ है क्योंकि अब बेहतर सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. तिरुमाला मंदिर भगवान विष्णु के एक रूप भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि कलियुग के कष्टों और क्लेशों से मानवता को मुक्ति दिलाने के लिए वे धरती पर आए थे.