चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय की सरकार बनने के बाद भी सियासी चुनौतियां खत्म होती नजर नहीं आ रहीं. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी. इसके बाद कई सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
अब सरकार गठन के तुरंत बाद एक नया विवाद सामने आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति को फिलहाल विधायक पद की शपथ लेने से रोक दिया है. उन्होंने तिरुपत्तूर सीट से बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की थी. चुनाव परिणामों के मुताबिक सेतुपति को 83,375 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी के. आर. पेरियाकरुप्पन को 83,374 वोट हासिल हुए. यानी सिर्फ एक वोट के अंतर से नतीजा तय हुआ.
इस बेहद मामूली अंतर को लेकर डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उनका आरोप है कि डाक मतपत्रों की गिनती में अनियमितता हुई, जिसकी वजह से परिणाम प्रभावित हुआ। मामले की सुनवाई तक हाईकोर्ट ने सेतुपति को शपथ लेने से रोक दिया है. इसका असर सीधे आगामी फ्लोर टेस्ट पर पड़ सकता है, क्योंकि वे विश्वास मत में हिस्सा नहीं ले पाएंगे.
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK को 108 सीटें मिली हैं. विजय की दो सीटों पर जीत के बाद एक सीट खाली होनी है, जिससे पार्टी का प्रभावी आंकड़ा घट सकता है. हालांकि, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे दलों ने समर्थन देने का एलान किया है, जिससे विजय खेमे का आंकड़ा 121 तक पहुंचता दिख रहा है.
संख्याओं के लिहाज से विजय फिलहाल सुरक्षित नजर आते हैं, लेकिन सत्ता की राजनीति सिर्फ गणित नहीं होती. फ्लोर टेस्ट से पहले कोर्ट का यह फैसला विपक्ष को नया मुद्दा दे सकता है और विजय सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है. अब सबकी नजरें संभावित फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं, जहां सरकार की असली ताकत सामने आएगी.