क्या ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की तारीख नजदीक आ रही है. ममता बनर्जी ने जो गलती जिंदगीभर नहीं की वो उन्होंने अब कैसे कर दी. क्या ममता बनर्जी को अदालत से डर नहीं लगता? ये सवाल बंगाल में हर कोई पूछ रहा है. क्योंकि ममता बनर्जी ने जो किया है, उसे सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज भी गुस्से से लाल हो उठेंगे. पूरी कहानी 5 लाख फर्जी सर्टिफिकेट से जुड़ी है, जिसके बारे में खबर पढ़कर आपको पता चलेगा.
दरअसल बंगाल हाईकोर्ट के जज साहब ने कहा कि राज्य सरकार को 1993 के कानून के मुताबिक आयोग की सिफारिश विधानसभा को सौंपनी होगी. इसी के आधार पर ओबीसी की लिस्ट बनाई जाएगी. तपोब्रत चक्रवर्ती की बेंच ने कहा कि ओबीसी किसे माना जाएगा, इसका फैसला विधानसभा करेगी. बंगाल पिछड़ा वर्ग कल्याण को इसकी सूची तैयार करनी होगी. राज्य सरकार उस लिस्ट को विधानसभा में पेश करेगी, जिनके नाम इस लिस्ट में होंगे उन्हीं को ओबीसी माना जाएगा.
इस तरह से ओबीसी सर्टिफिकेट देना असंवैधानिक है. यह सर्टिफिकेट पिछड़ा वर्ग आयोग की कोई भी सलाह माने बगैर जारी किए गए. इसलिए इन सभी सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया है. हालांकि यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें पहले नौकरी मिल चुकी या मिलने वाली है.
करीब 5 लाख लोगों के सर्टिफिकेट अदालत के इस आदेश के बाद रद्द होने वाले हैं. जज साहब का आदेश बताता है कि ममता सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करवाए. याचिका में ये तक आरोप लगाए गए कि जो असल में ओबीसी सर्टिफिकेट के हकदार थे, उन्हें सर्टिफिकेट नहीं दिया गया. बावजूद उसके ममता बनर्जी का कहना है कि हम कोर्ट के आदेश को नहीं मानेंगे.
ममता बनर्जी ने कहा कि ''मैं हाईकोर्ट और भाजपा के आदेश को नहीं मानूंगी. राज्य में ओबीसी आरक्षण जारी रहेगा. इन लोगों की हिम्मत तो देखिए, ये हमारे देश का एक कलंकित अध्याय हैं. ओबीसी आरक्षण लागू करवाने से पहले कई सर्वे कराए गए थे.
ममता बनर्जी जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कोर्ट के लिए कर रही हैं ये शायद उन्हें मुश्किल में डाल सकता है और कोर्ट की अवमानना का मुकदमा उन पर दर्ज हो सकता है. जिसके बाद अदालत ये तय करेगी कि सजा क्या सुनानी है.
अवमानना की सजा में प्रशांत भूषण को एक रुपये के जुर्माने की सजा दी गई थी, लेकिन ममता के केस में मामला बढ़ सकता है. क्योंकि एक मुख्यमंत्री अगर ये कहे कि हम अदालत के आदेश को नहीं मानेंगे तो सोचिए उस राज्य की जनता अदालत को लेकर क्या सोचेगी.