कोलकाता : पश्चिम बंगाल में एक बार फिर पहचान और विचारधारा की राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है. मामला एक ऐतिहासिक कॉलेज की इमारत से जुड़ा है, जहां महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय के नाम से राम शब्द मिटा दिए जाने का आरोप लगा. करीब तीन महीने पहले सामने आई इस घटना पर तब की राज्य सरकार और कॉलेज प्रशासन की चुप्पी ने विवाद को और बढ़ा दिया था.
करीब डेढ़ सौ साल पुराने इस कॉलेज में हजारों छात्र पढ़ते हैं. आरोप है कि कॉलेज भवन पर लिखे नाम से राम शब्द को जानबूझकर हटाया गया, लेकिन न तो प्रशासन ने कोई शिकायत दर्ज कराई और न ही सरकार की ओर से जांच की गई. इस घटना को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए कि क्या यह केवल एक संयोग था या फिर धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों को कमजोर करने की कोशिश.
अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उसी स्थान पर दोबारा राम शब्द लिख दिया गया है. इसे लेकर बीजेपी नेताओं ने कहा कि बंगाल में अब सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सम्मान मिल रहा है. वहीं तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसके शासनकाल में राम के नाम और हिंदू प्रतीकों को लेकर नकारात्मक रवैया अपनाया गया.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद केवल एक नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई का प्रतीक बन चुका है. इससे पहले भी राज्य में जय श्री राम के नारों और पाठ्यपुस्तकों में रामधनु शब्द बदलने जैसे मुद्दों पर विवाद हो चुका है. अब यह मामला केवल एक कॉलेज के नाम का नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में संस्कृति, पहचान और आस्था की बहस का हिस्सा बन गया है.