इस्तीफा या कुछ और, क्या मांग रहे ममता बनर्जी का अभेद्य किला घेरने वाले प्रदर्शनकारी?

Global Bharat 27 Aug 2024 03:21: PM 2 Mins
इस्तीफा या कुछ और, क्या मांग रहे ममता बनर्जी का अभेद्य किला घेरने वाले प्रदर्शनकारी?

ये तस्वीरें कोलकाता की सड़कों की है, दौड़ती-भागती भीड़, हाथों में बैनर और तख्तियां लिए नारे लगाते लोग, और पीछे-पीछे दौड़ते पुलिसकर्मी, न बैरिकेडिंग का गेट प्रदर्शनकारियों को रोक पा रहा है, और ना ही पानी की बौछार से रुक रहे हैं, दीदी की पुलिस इन्हें रोकने का जितना प्लान बना रही सब फेल हो जा रहा है, 27 अगस्त की सुबह से ही बंगाल के डीजीपी बैठक पर बैठक कर रहे हैं लेकिन प्रदर्शनकारियों के हौसले के आगे बंगाल पुलिस पस्त होती नजर आ रही है, तो सवाल ये है कि क्या आंदोलन से निकलीं ममता बनर्जी की कुर्सी खुद आंदोलन की भेंट चढ़ जाएगी. क्योंकि 54 साल बाद बंगाल में ऐसा आंदोलन हो रहा है, जिसका कोई एक नेता नहीं है, बल्कि पूरी जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी है. कहा जा रहा है कि जैसे दिल्ली में अन्ना हजारे वाले आंदोलन में लोग खुद ब खुद जुड़ रहे थे, ठीक वैसे ही कोलकाता वाले प्रोटेस्ट में लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. पहले ये भीड़ सड़कों पर कम थी, लेकिन देखते ही देखते लाखों में तब्दील हो गई.

कौन है प्रदर्शनकारियों का नेता?

पश्चिमबंगल छात्र समाज, एक नया और अनरजिस्टर्ड संगठन है, जिसमें रबिन्द्र भारती यूनिवर्सिटी के छात्र प्रबीर दास, कल्याणी यूनिवर्सिटी के शुभांकर हलदर और रबिन्द्र मुक्त यूनिवर्सिटी के सायन लाहिरी शामिल हैं. जिन्होंने नबन्ना मार्च का ऐलान किया.

क्या है नबन्ना?

नबन्ना भवन हावड़ा में है, जहां पश्चिम बंगाल का सचिवालय है, नीले और सफेद रंग की इस 14 मंजिला इमारत से ही पूरी बंगाल सरकार चलती है. इसके सबसे ऊपरी फ्लोर पर सीएम ममता बनर्जी का ऑफिस है, जबकि 13वीं मंजिल पर गृह सचिव और चौथे-पांचवें फ्लोर पर गृह विभाग का कार्यालय है.

किसी भी प्रदर्शन में ऐसी जगहों को घेरकर ही प्रदर्शनकारी अपनी मांगें मनवाने की कोशिश करते हैं. कोलकाता में लाखों की संख्या में उतरे छात्रों और आम जनता के लीडर का कहना है कि हमारा सियासत से कोई लेना देना नहीं है, हमारी बस तीन मांगें सरकार पूरी करे. फिर हम सड़कों से खुद हट जाएंगे. 

  • पहली मांग- ममता बनर्जी सीएम पद से इस्तीफा दें
  • दूसरी मांग- डॉक्टर बिटिया को इंसाफ मिले
  • तीसरी मांग- जो भी दोषी है उसे सख्त सजा मिले

हालांकि प्रदर्शनकारी ये भी कहते हैं कि ममता बनर्जी के पास स्वास्थ्य विभाग भी है, इसलिए उनको इस्तीफा देना होगा, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग का ये बड़ा खेल पकड़ा गया है, आखिर एक कॉलेज में इतना कुछ चल रहा था, तो ममता बनर्जी को पता कैसे नहीं चला, या जानबूझकर इन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया, आखिर संदीप घोष को बचाने की कोशिश कौन कर रहा था. हालांकि ममता बनर्जी के नेता इसे सियासी साजिश बता रहे हैं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष तो ये कहती हैं कि इस प्रदर्शन में मुश्किल से ही कोई महिला नजर आ रही है. सिर्फ 4-5 राष्ट्रीय ध्वज हैं. यह विरोध-प्रदर्शन पिकनिक जैसा है, जिसमें प्रदर्शनकारी पानी की बौछार के नीचे ठंडा स्नान कर रहे हैं.

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा था कि प्रदर्शन करने का हक हर किसी को है, यही ममता बनर्जी जो ये बात कुछ दिनों तक पहले तक दोहराती थीं कि किसानों को आंदोलन करने देना चाहिए, अब इस आंदोलन को ये कहकर रोकना चाहती हैं कि इस प्रदर्शन में आरएसएस के कुछ लोग घुसे हुए हैं, जो राज्य का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं. पर सवाल ये है कि राज्य में कानून व्यवस्था की हालत तो पहले से ही खराब है. आज सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच झड़प की तस्वीर जो भी देख रहा है, वो यही कह रहा है कि क्या दीदी देख नहीं रही हैं.

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