वक्फ बोर्ड पर बाबा बागेश्वर का बड़ा ऐलान सुन हिला अखिलेश-चंद्रशेखर का दिमाग!

Global Bharat 16 Sep 2024 08:21: PM 2 Mins
वक्फ बोर्ड पर बाबा बागेश्वर का बड़ा ऐलान सुन हिला अखिलेश-चंद्रशेखर का दिमाग!

वक्फ बोर्ड को लेकर अगले 72 घंटे में कुछ बड़ा होने वाला है, ओवैसी से लेकर अखिलेश तक जो अभियान चला रहे हैं, चंद्रशेखर जो खुद को वक्फ बोर्ड का बड़ा हितैषी बता रहे हैं, इन सबके दावों पर क्या होने वाला है, अगले 3 मिनट में तफसील से समझाते हैं, पर उससे पहले बाबा बागेश्वर का वो बयान सुनिए जिसने वक्फ बोर्ड के पैरवीकारों की नींद उड़ा दी है. मैं किसी मजहब के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि लैंड जिहाद के खिलाफ हूं. वक्फ बोर्ड जिस तरीके से कदम उठा रहा है, उस पर शिकंजा कसा जाना जरूरी है.

देश के तमाम साधू-संत इसी बात को दोहराते हैं, और मोदी कानून भी इसी आधार पर लेकर आते हैं कि वक्फ की मनमानी पर रोक लगे, लेकिन ओवैसी की भाषा बोलने वाला राहुल गांधी इस पीड़ा को शायद समझना ही नहीं चाहते, इसीलिए इस बिल का विरोध शुरू कर देते हैं, सड़कों पर उतरकर मुस्लिम समुदाय के लोग क्यूआर कोड कैंपेन चलाने लगते हैं, और उनके नए-नए रहनुमा बने चंद्रशेखर ये तक दावा करने लगते हैं कि केन्द्र की सरकार जो वक्फ अमेंडमेंट बिल लाई है, जिसको कानून बनाना चाहती है. जिस दिन ये बिल आया था, संसद में हमने उस दिन इसका जोरदार विरोध किया था.

हमने मांग की थी कि ये बिल गलत है फिर उस पर जेपीसी बनी. ये बिल संविधान के आर्टिकल 14-15 और संविधान ने जो आजादी दी है सभी धर्मों के लोगों को, ये उसके विरोध में है. ये असंवैधानिक बिल है. मैं स्पष्ट कर दूं बड़े से बड़े आंदोलन के लिए हमलोग तैयार हैं, अगर सरकार इसे वापस नहीं लेती.

मतलब चंद्रशेखर इशारों ही इशारों में मुस्लिम युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए कह रहे हैं, और ये बात इसलिए बड़ी हो जाती है क्योंकि कुछ दिन पहले दिल्ली में चंद्रशेखर ने प्रदर्शन की जो ताकत दिखाई है, जो भीड़ जुटी थी, उसने बड़े-बड़े नेताओं की नींद उड़ा दी है, इसीलिए सरकार को ये भी सोचना होगा कि सीएए/एनआरसी की तरह अगर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया तो उससे कैसे निपटेंगे. देश के अलग-अलग हिस्सों में दूसरा शाहीन बाग बनने से कैसे रोकेंगे. क्योंकि अगले 72 घंटे में जो होने वाला है, उसके बाद वक्फ बोर्ड की पूरी तस्वीर आपकी आंखों के सामने साफ हो जाएगी, आपको समझ आ जाएगा कि वक्फ बोर्ड पर कानून पास होने जा रहा है, या फिर कृषि कानून की तरह मोदी सरकार को यहां भी कदम पीछे खींचने होंगे.

दरअसल, 18, 19 और 20 सितंबर को जेपीसी यानि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की बैठक होनी है. बैठक के पहले दिन अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधिकारी जेपीसी के सामने सबूत रखेंगे. 19 सितंबर को पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति फैजान मुस्तफा, पसमांदा समाज और AIMPLB के लोग अपनी राय देंगे. 20 सितंबर को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, दिल्ली और कई विशेषज्ञों अपना सुझाव देंगे.

इसके बाद 31 सदस्यों वाली कमेटी इस पर फैसला करेगी कि वक्फ बोर्ड बिल में क्या-क्या सुधार करना है. सूत्र बताते हैं कि वक्फ की जमीन पर कलेक्टर ही आखिरी फैसला लेंगे, क्योंकि इस कानून का मकसद ही वक्फ को कंट्रोल में लाना है, और अगर कलेक्टर के हाथ से बाहर पावर गई तो फिर वक्फ अभी की तरह ही अनकंट्रोल हो सकता है, बड़ी बात ये है कि वक्फ बोर्ड जो अभी मनमाने तरीके से किसी भी जमीन को अपना बता देता है, फिर वहां पर मस्जिद, दरगाह कुछ भी बनवाने का फैसला ले लेता है, उस पर भी इस कानून के आने से रोक लगेगी, जिसे लेकर अभी से मुस्लिम युवाओं को ये कहकर भड़काया जा रहा है कि अगर कानून पास हो गया तो नमाज के लिए भी परमिशन लेनी होगी. 

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