अभिषेक चतुर्वेदी
बिहार में एक कहावत है, चौबे चले थे छब्बे बनने, दूबे बनकर लौटे, यानी महत्वकांक्षा पूरी करने के चक्कर में जो हाथ में है, उसे भी गंवा दिया, तो क्या केशव प्रसाद मौर्य के साथ अब यही होने वाला है. अपनी ही सीट हारने के बावजूद केशव के पास बीते 7 वर्षों से डिप्टी सीएम की कुर्सी है, लेकिन उनकी महत्वकांक्षा सीएम बनने की है. प्रमोशन हर कोई चाहता है, पर कभी-कभी तरीका गलत हो जाता है. केशव प्रसाद मौर्य गुट के नेता बीते लंबे समय से योगी के खिलाफ रणनीति बनाने में लगे हैं. ऐसी कई रिपोर्ट मीडिया में सामने आई और ये बात तब आगे बढ़ गई जब बीते दिनों दिल्ली में जब उन्होंने जेपी नड्डा से मुलाकात की. 60 मिनट की मुलाकात में दोनों के बीच क्या-क्या बातचीत हुई. उसकी तीन तरह की जानकारियां सामने आई हैं.
पहली- यूपी में क्या चल रहा है, 2024 चुनाव में बीजेपी के खराब परफॉर्मेंस की जो समीक्षा रिपोर्ट आई है, उस पर यूपी बीजेपी में कितना मंथन हुआ, उपचुनाव का क्या प्लान है?
दूसरी- योगी सीएम हैं, वही सीएम रहेंगे ये बात कई बार बोल चुके हैं, फिर मीडिया में योगी के खिलाफ कुछ विधायक क्यों बयान दे रहे हैं, ये योगी के खिलाफ माहौल की क्या कहानी है?
तीसरी- पार्टी ओबीसी चेहरे को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर विचार कर रही है, यूपी की सियासत में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर क्या चर्चा है?
नड्डा की सियासत को समझने वाले लोग कहते हैं कि वो बड़े ही साधारण से सवालों से बड़ा जवाब तलाश लेते हैं. केशव प्रसाद मौर्य के साथ चूंकि यूपी बीजेपी के अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी भी मौजूद थे, इसलिए संगठन स्तर की बातचीत न हो, ये संभव नहीं है. ये मीटिंग इसलिए भी अहम हो जाती है, क्योंकि एक दिन पहले ही पार्टी की बैठक में मौर्य ने कहा था संगठन सरकार से बड़ा है और दूसरे ही दिन नड्डा के पास पहुंच गए, जिसके बाद कई लोगों ने ये सवाल भी पूछा कि केशव खुद गए या फिर तलब किए गए हैं.
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तलब किए जाने की संभावना इसलिए ज्यादा लगी क्योंकि मीटिंग के कुछ ही घंटे बाद ये जानकारी सामने आई कि पार्टी हाईकमान ने ये साफ कर दिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव योगी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. यानी केशव की तरह कुर्सी की चाह रखने वाले नेताओं को पार्टी अब ज्यादा एंटरटेन नहीं करेगी. तो सवाल ये उठता है कि क्या केशव प्रसाद मौर्य की डिप्टी सीएम की कुर्सी भी जाने वाली है.
योगी ने लखनऊ में जो मीटिंग में बुलाई, उसमें उपचुनाव पर चर्चा होनी है. यूपी की 10 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव की तारीख अभी नहीं आई है, पर योगी ने पहले ही इन सभी सीटों के लिए प्रभारी तय कर दिए हैं. करहल में जयवीर सिंह, मिल्कीपुर में सूर्य प्रताप शाही और मयंकेश्वर शरण सिंह, कटेहरी में स्वतंत्र देव सिंह और आशीष पटेल, सीसामऊ में सुरेश खन्ना और संजय निषाद, फूलपुर में दयाशंकर सिंह और राकेश सचान, मझवां में अनिल राजभर, गाजियाबाद सदर में सुनील शर्मा, मीरापुर में अनिल कुमार और सोमेन्द्र तोमर, खैर में लक्ष्मी नारायण चौधरी, और कुंदरकी में धर्मपाल सिंह के साथ जेपीएस राठौर चुनाव की कमान संभालेंगे.
इस लिस्ट में शामिल ज्यादातर मंत्री योगी के खास हैं. पर केशव का जिक्र उपचुनाव में कहीं होता नजर नहीं आ रहा, तो क्या ये संकेत है कि उनकी डिप्टी वाली कुर्सी जाने वाली है और फिर दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है. अगर ऐसा हुआ तो फिर केशव की जगह डिप्टी सीएम आपके हिसाब से किसे होना चाहिए, कमेंट कर बता सकते हैं.