क्या है वक्फ बाय यूजर? पाकिस्तान से बांग्लादेश तक मचा घमासान, 5 मई को क्या होगा?

Abhishek Shandilya 18 Apr 2025 09:16: PM 2 Mins
क्या है वक्फ बाय यूजर? पाकिस्तान से बांग्लादेश तक मचा घमासान, 5 मई को क्या होगा?

ग्लोबल भारत नेशनल डेस्क: पाकिस्तान-बांग्लादेश में वक्फ़ बोर्ड को लेकर दहशत देखी जा रही है! इसलिए वहां भी वक्फ़ बोर्ड का विरोध हो रहा है. बांग्लादेश के जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर ने बयान जारी कर इस विधेयक के पास होने की निंदा की है. पाकिस्तानी मीडिया ने इसे मुसलमान समुदाय के खिलाफ बता डाला है तो वहीं पाकिस्तान के अख़बार द डॉन ने एक लेख में लिखा कि मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए नया विधेयक पास किया है. सुप्रीम कोर्ट 5 मई को वक्फ़ पर फैसला सुना सकता है! सबसे बड़ी बहस इस बात पर है कि, क्या कलेक्टर की ताकत पर कोर्ट रोक लगाएगा. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर कलेक्टर को नए वक्फ कानून में कौन सी ताकत मिल गई, जिसका विरोध हो रहा है.

क्या है नए वक्फ़ कानून में कलेक्टर की ताकत?

वक्फ संशोधन बिल में वक्फ संपत्तियों के सर्वे का अधिकार अब जिले के कलेक्टर को दे दिया गया है. पहले ये अधिकार वक्फ कमिश्नर के पास हुआ करता था. सरकार के कब्जे वाली वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद की स्थिति में अब कलेक्टर का फैसला प्रभावी माना जाएगा. बिल में ये प्रावधान किया गया है कि अगर कोई सरकारी जमीन वक्फ के रूप में पहचानी गई है, तो उसे वक्फ नहीं माना जाएगा. कलेक्टर ये तय करेगा कि संपत्ति पर किसका अधिकार है और वो अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा? इसके अलावा, अब वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को अंतिम नहीं माना जाएगा? इन फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी? इसी बात से मौलाना डरे हैं, अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?

कलेक्टर के पास ताकत होगी, सरकार एक साल में सर्वे का काम पूरा करवा सकती है, कानून ताकतवर तरीके से लागू होगा, भ्रष्टाचार भी कम हो सकता है, इसलिए पाकिस्तान के अख़बार तक ये लिख रहे हैं कि भारत में मोदी सरकार मुस्लिम विरोधी है, और एक मुस्लिम विरोधी कानून लागू कर दिया गया है! यानि ये तय है कि भारत में कोई बड़ा आन्दोलन हो सकता है, क्योंकि जब-जब पाकिस्तान और बांग्लादेश में भारत के किसी कानून को लेकर हलचलच बढ़ती है, शाहीनबाग मॉडल बनकर उभरता है.भारत में होने वाले ज्यादातर दंगों के पीछे पाकिस्तान और बांग्लादेश का ही हाथ पाया जाता है! अब आगे समझिए दूसरी आपत्ति क्या है? क्यो डरे हैं मौलाना? वक्फ़ बाई यूज़र पर बहस हो रही है तो उसे भी समझिए.

अब समझते हैं कि वक्फ बाय यूजर के मायने

वक्फ बाय यूजर यानी जो संपत्ति धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल में थी, उसे अब वक्फ नहीं माना जाएगा, नए प्रावधान में इसे हटाया गया है. 'वक़्फ़ बाय यूजर' के सिद्धांत का मतलब है कि ऐसी संपत्ति जो मस्जिदों और कब्रिस्तानों जैसे धार्मिक या धार्मिक उद्देश्य के लिए निरंतर उपयोग के कारण वक्फ बन जाती है, भले ही इसे औपचारिक रूप से वक्फ घोषित न किया गया हो, वक्फ के लिए ये शर्त जोड़ी गई है कि व्यक्ति को कम से कम पिछले पांच साल से इस्लाम धर्म का पालन करने वाला होना चाहिए.

यानि वक्फ़ बाय यूज़र और कलेक्टर की ताकत को लेकर ही यहां से लेकर पाकिस्तान तक हाहाकार मचा है? सुप्रीम कोर्ट से यही दो ताकत छिनने की कोशिश कपिल सिब्बल कर रहे हैं. भारत में वक्फ़ का पूरा माहौल बन गया है. बंगाल से लेकर दिल्ली तक हलचल कम होने की बजाय बढ़ रही है, दिल्ली में सरकार में भी तेजी है. सेना से लेकर डोभाल तक ज्यादा व्यस्त है. अब कौन कायदा तोड़ेगा और किसको सरकार? ये वक्त ही बता पाएगा!

What is Waqf by User? uproar over Waqf law Yogi Adityanath Supreme Court decision

Recent News