हजारों की भीड़ ने दी योगी को खुली चुनौती! थाने को घेरा, क्या UP में दंगे की है साज़िश?

Abhishek Shandilya 13 Sep 2025 08:13: PM 5 Mins
हजारों की भीड़ ने दी योगी को खुली चुनौती! थाने को घेरा, क्या UP में दंगे की है साज़िश?

नई दिल्ली: क्या UP के शाहजहांपुर में एक प्रयोग किया गया? बोरी में भरी जाती चप्पलें, सड़क पर पत्थर के निशान, भीड़ में नारेबाज़ी का शोर और योगी को सीधे चुनौती देने की तैयारी! एक फोटो वायरल होती है या करवाई जाती है? जुमे की नमाज वाले दिन दोपहर में ऐसा क्या हुआ था कि शाम की नमाज से पहले शहर में हज़ारों की संख्या में मुसलमान जमा हो जाते हैं? कई तरह की चर्चा है? कांग्रेस नेताओं की भूमिका आखिर जांच के दायरे में क्यों है? पुलिस पूरे मामले पर साफ-साफ क्यों नहीं बताती हैं कि शहर में इतनी भीड़ क्यों जमा हुई? योगी आदित्यनाथ के UP में कौन करवाना चाहता था भीषण दंगा? कौन है केके दीक्षित जिसने फेसबुक पर मुस्लिम धर्म के बारे में अनाप-शनाप लिखा? शाहजहांपुर में क्या प्रयोग किया गया? जो सफल नहीं हो पाया? हमारी ये रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी! जानकारी के मुताबिक केके दीक्षित जिसने मुस्लिम धर्म के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातें लिखी उसकी पहले कुछ लोगों से बहस हुई थी! बहस के दौरान ही मामला गरम हो गया था...दोपहर जुमे की नमाज के दौरान ही ये मामला चर्चा में आया था....

शाम होते ही उसने 6 बजे के आस-पास एक पोस्ट लिखी.. जिसमें मुस्लिम धर्मग्रंथ कुरान शरीफ के बारे में टिप्पणी की, साथ ही पैंगबर मोहम्मद के बारे में भी कई आपत्तिजनक बातें लिखी थी...इस पोस्ट के बाद रात करीब 8 बजे मस्जिद में नमाज पढ़ने के दौरान मुस्लिम जमा हुए, ऐसा कहा जा रहा है कि मस्जिद से नारे लगाए गए! भीड़ को उकसाया गया! क्योंकि योगी की पुलिस ने अपना काम पहले ही कर दिया था...केके दीक्षित के ख़िलाफ़ शिकायत मिलते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था...फिर थाने के बाहर सर तन से जुदा का नारा लगा...ये भीड़ की तस्वीरें देखिए, यहां पर हज़ारों की संख्या आपको लोग दिखाई देंगे, पत्थरबाज़ी भी हुई है, जिसके निशान यहां दिखाई देते हैं? तो सवाल ये है कि केके दीक्षित ने ऐसा क्यों लिखा? थाने को घेरने वाली प्रयोगशाला किसके कहने पर लगाया गया?

FIR में क्या लिखा है, ''सेवा में, कोतवाली सदर बाज़ार शाहजहांपुर, निवेदन हैं कि केके दीक्षित ने अपनी फेसबुक स्टेटस पर पवित्र इस्लामिक ग्रंथ कुरान शरीफ और पैगम्मबर मोहम्मद साहब पर बहुत ही अभद्र शब्दों के साथ गालियां भी लिखी है....12 सितंबर को शाम करीब 6:30 मिनट पर एक पोल्ट फेसबुक पर की गई, वो पोस्ट वायरल हुई, हमारी धार्मिक भावनाएं आहत हुई? दंगा भड़काने की कोशिश की गई है, कृपया राष्ट्रद्रोह लगाया जाए...''

ईदगाह कमेटी के सईद कासिम रज़ा ने ये आवेदन पत्र दिया, कुछ देर बाद ही पुलिस ने केके दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया, अगले कुछ देर बाद मस्जिद के लिए लोग जमा हुए, वो थाने तक कैसे पहुंचे? किसने भड़काया? वहां एक राजनीतिक पार्टी के नेता या कार्यकर्ता भी क्यों थे? हज़ारों की संख्या में शहर में नारेबाज़ी शुरू होती है, सर तन से जुदा, अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए गए! पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए भीड़ को कंट्रोल में कर लिया, लाठी चार्च का सहारा लेना पड़ा? लेकिन शाहजहांपुर में जो हुआ उसे एक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है? शाहजहांपुर के SP राजेश द्विवेदी हैं, जिन्हें महाकुंभ में भी जिम्मेदारी मिली थी, जबकि वहां के DM धर्मेंद्र कुमार सिंह हैं, जिनके पास अच्छा अनुभव है!

प्रयोग किसने किया था. इसकी जांच हो रही है, लेकिन पुलिस स्टेशन, शहर के रास्ते के साथ शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन तक को भीड़ ने घेर लिया था...नारेबाज़ी हो रही थी...पुलिस ने जैसे तैसे करके मामला ठंठा किया है. अब जांच हो रही है, योगी आदित्यनाथ ने रिपोर्ट लखनऊ मंगवाई है? घटना के एक दिन बाद विश्व हिन्दू परिषद के नेता SP राजेश द्विवेदी से मिलने पहुंचे, उनका दावा है कि ये भीड़ उपद्रव की साज़िश के साथ आई थी, इसकी जांच होनी चाहिए! शाहजहांपुर की मुस्लिम महिला ने भगवान के ख़िलाफ़ टिप्पणी की है, जिसकी गिरफ्तारी की मांग की जा रही है, ये लुबिना जिया नाम की महिला का एक फेसबुक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें वो हिन्दू देवी-देवाताओं पर आपत्तीजनक टिप्पणी कर रही हैं! माहौल खराब करने वालों पर पुलिस की नज़र है? लेकिन शाहजहांपुर में चर्चा कई तरह की है...

पुलिस इस एंगल पर जांच कर रही है, कि केके दीक्षित ने पोस्ट खुद से लिखी या किसी ने लिखवाई, जब दोपहर बहस हुई थी तो वो बात पुलिस को क्यों नहीं बताई गई? नमाज से पहले शाम 6 बजे का वक्त पोस्ट के लिए क्यों चुना गया, पुलिस इस एंगल पर जांच कर रही है कि एक पॉलिटिकल पार्टी क्या भीड़ को उकसाना चाह रही थी? एक पक्ष जो शिकायत कर रहा है, दरअसल वो एक पार्टी से जुड़ा है? अगर पुलिस ने FIR लिखी थी तो भीड़ ने नारेबाज़ी क्यों की? थाना क्यों घेरा?

UP में योगी ने दंगा रोकने का मॉडल तैयार किया है, शाहजहांपुर इकलौती घटना नहीं है, इसके पहले पश्चिम UP के कई ज़िलों में इस तरह की आग भड़काने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस उसे तुरंत रोक लेती है… योगी फौरन ATS उतार देते हैं, योगी सरकारी संपत्ति नुकसान होने पर वसूली करते हैं, जिस शहर में दंगा किया, नुकसान पहुंचाया जाता है, वहां दंगाइयों के पोस्ट लगाए जाते हैं.. पिछले कुछ महीने और वर्षों में UP में दंगा नहीं हो रहा है, योगी आदित्यनाथ अक्सर अपनी रैलियों में इसका जिक्र करते हैं? क्या ये इमेज किसी पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है? संभल में हिंसा करने वाले आज तक अपनी ज़मानत याचिका कोर्ट में लगा रहे हैं, कईयों के घर बुलडोज़र ने तोड़ दिए हैं, जबकि खुद सांसद बर्क भी फंस गए है? शाहजहांपुर में हुई घटना बेहद बड़ी हैं, लेकिन DM-SP ने दिमाग से संभाल लिया, पुलिस थाने को जिस हिसाब से घेरा गया था, वो दृष्य डरावना था...अब एक सच और जानिए.

2017 से लेकर अब तक प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों में 97 से 99 फीसदी तक की कमी आई है. 2017 से अब तक यूपी में दंगे नहीं हुए हैं. जबकि 2012 से 2017 (सपा कार्यकाल) तक प्रदेश में 815 सांप्रदायिक दंगे और 192 लोगों की मौत हुई थी. 2007 से 2011 के बीच 616 सांप्रदायिक घटनाएं हुईं, इसमें 121 लोगों की मौत हुई थी…

यानि अगर दंगा नहीं होता है तो किस पार्टी को नुकसान होगा? मुसलमानों को एक करने की योजना किस राष्ट्रीय पार्टी की है? ये सब चर्चा का विषय हो सकता है, फिलहाल शाहजहांपुर में शांति है, इसके लिए योगी के मॉडल की चर्चा हो रही है, क्योंकि कुछ ऐसा ही हुआ था, महाराष्ट्र के नागपुर में लेकिन वहां देवेंद्र फडणवीस की पुलिस भीड़ को नहीं संभाल पाई थी, लेकिन UP में योगी का मॉडल हिट है!

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